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HOW TO BECOME AN IPS OFFICER IPS Exam 2020, Syllabus, Eligibility, Salary Of IPS Officer-educationbucket

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HOW TO BECOME AN IPS OFFICER?(जानिए कैसे बन सकते है IPS ऑफिसर?)

IPS civil services में सबसे प्रतिष्ठित पदों में से एक है जो IAS के बाद आता है। यह कई लाभो के साथ सरकार में सबसे अच्छे वेतन पर भारतीय पुलिस सेवा IPS भारत की मुख्य तीन नागरिक सेवाओ में से एक है। भारतीय पुलिस में क्लास वन officer यानी IPS बनने के लिए Civil service exam क्लियर करना होता है। UPSC (union public service commission)हर साल इस एग्जाम को कंडक्ट करती है। हर साल लाखों लोग इस एग्जाम में बैठते है। जिनमे से कुछ ही का final selection होता है। और जो उम्मीदवार UPSC Civil services exam को सफलतापूर्वक पास करता है , वे सभी उम्मीदवार “सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी , हैदराबाद (आंध्र प्रदेश)(sardar vallabhbhai patel national police academy, hydrabad,andra pradesh) में कठोर प्रशिक्षण से गुजरते है। गृह मंत्रालय को IPS अधिकारियों के कैडर को नियंन्त्रित करने के लिए अधिकृत किया गया।

  1. IPS की स्थापना कब हुई?
  2. 1948 में आईपीएस स्थापित की गई थी।
  3. आईपीएस का फुल फॉर्म क्या है ?
  4. आईपीएस(IPS) का फुल फॉर्म Indian Police Services(इंडियन पुलिस सर्विसेज) है।

WORK OF IPS OFFICER : IPS Officer के कार्य?

WORK OF IPS OFFICER IPS Officer के कार्य :- कानून और व्यवस्था को बनाये रखना, दुर्घटना से बचने और निपटना, कुखयात अपराधियो और अपराधों को रोकने , और यातायात प्रबंधन की जिम्मेदारियां होती है। इन कर्तव्यों के अलावा भी कई प्रकार की जिम्मेदारियां होती है जैसे:- नशीली दवाओं की तश्करी, मानव तस्करी, सीमा सुरक्षा बनाये रखना, आतंकवाद रोकना, रेलवे पुलिस और साइबर अपराधो का निरीक्षण व नज़र रखना आदि। IPS Officers को भी CBI , RAW, और IB अर्धसैनिक बलों जैसे असम राइफल्स , बीएसएफ (BSF), सीआरपीएफ (CRPF), आईटीबीपी(ITBP) जैसे रणनीतिक खुफिया एजेंसियों का नेतृत्व करने के लिए जाना जाता है। एक IPS Officer अपने carrier को ASP के रूप में एक राज्य sarkar की सेवा में एक प्रोबेशनरी ऑफिसर के रूप में शुरू करता या करती है।

IPS Officers को दिये गए माध्यमो से चुना जाता है:-

(1) UPSC द्वारा आयोजित Civil Service Exam के माध्यम से।

(2) UPSC द्वारा आयोजित सीमित प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से।

(3) राज्य पुलिस द्वारा पदोन्नति प्राप्त मौजुदा पुलिसकर्मियो में से।

चयन के बाद , IPS अधिकारियो को हैदराबाद और मसूरी में पुलिस अकादमी में परिवीक्षाधीन प्रशिक्षण और फिर भारतीय पुलिस सेवाओ में शामिल होने के लिए ,पात्रता की जांच के लिए शेक्षणिक प्रशिक्षण दिया जाता है।

Designation according to the posts of IPS officers: -अधिकारियों के पदों के अनुसार पदनाम:-

पुलिस अधीक्षक एसपी(S. P) superintendent of police

उप महानिरीक्षक डीआईजी (DIG) Deputy Inspector of General of Police

इंस्पेक्टर जनरल आईजी (IG) Inspector General

अतिरिक्त महानिर्देशक एडीजी (ADG) Additional Director General police

पुलिस महानिदेशक डीजी (DG) Director General Of Police

Educational Qualification and Age Limit OF IPS OFFICER: -शैक्षिक योग्यता और उम्र सीमा :-


भारत , नेपाल और भूटान के graduate उम्मीदवार IPS exam में बैठ सकते है।।। उम्मीदवार की उम्र 21 से 30 साल के बीच होनी चाहिए। SC/ST वाले उम्मीदवारों को 5 साल की छूट दी जाती है।

Physical Ability Length OF IPS OFFICER: शारीरिक योग्यता लंबाई:-

पुरुष (male) उम्मीदवार की लंबाई कम से कम 165 cm होनी चाहिए। 160 cm के SC/OBC उम्मीदवार भी apply कर सकते है। male chest कम से कम 84cm।

महिला (female) उम्मीदवारों की लंबाई 150 cm होनी चाहिए। 145cm की SC/OBC महिला उम्मीदवार भी Apply कर सकती है। female chest कम से कम 79cm होना चाहिए।

स्वस्थ आंखों का विज़न 6/6 या 6/9 होना चाहिए।
कमजोर आंखों का विज़न 6/12 या 6/9 होना चाहिए।

UPSC द्वारा आयोजित IAS, IFS, IPS, IRS तथा अन्य प्रशासनिक पदों की नियुक्ति के लिए civil service exam क्लियर करना होता है। या exam के 2 चरण होते है:- प्रिलिमनेरी एग्जाम (प्रीलिम्स) और मेन एग्जाम

IAS OFFICER prelims exam:-

इसमे 200 -200 अंको के 2 पेपर होते है। दोनों ही पेपर में objective type सवाल पूछे जाते है।

paper 1:- 200 अंको के इस पेपर में राष्टीय और अंतरराष्ट्रीय करंट अफेयर्स, भारतीय इतिहास और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन , भारत और विश्व का भूगोल , भारतीय राजतन्त्र और गवर्नेंस (संविधान , पोलिटिकल सिस्टम , पंचायती राज, पब्लिक पॉलिसी ), आर्थिक और सामाजिक विकास ( सस्टेनबले डेवलपमेंट, गरीबी , जनसंख्या), इनवायरमेंटल इकोलॉजी , बायो डायवर्सिटी , क्लाइमेट चेंज और जनरल साइंस जैसे विषयों से सवाल पूछे जाते है । इस paper को attempt करने के लिए समय सीमा 2 घण्टे है।

paper2:– 200 अंक के इस exam में कॉम्प्रहेन्सन ,इंटरपर्सनल स्किल्स, लॉजिकल रीजनिंग और एनालिटिकल एबिलिटी, डिसिशन मेकिंग और प्रॉब्लम सॉल्विंग, जनरल मेन्टल एबिलिटी , बेसिक न्यूमरेसी। और डेटा इंटरप्रिटेशन से सवाल पूछे जाते है । इस paper को attemp करने के लिए 2 घण्टे का समय दिया जाता है।

IPS OFFICER MAIN EXAM मेन एग्जाम:-

civil service के exam में लिखित परीक्षा और interview शामिल है। लिखित परीक्षा में कुछ 9 exam होते है। जिनमे 2 qualifying(A और B) और 7 अन्य मेरिट के लिए है।

IPS OFFICER MAIN EXAM


paper subject number:


paper A (qualifying) (उम्मीदवारों को संविधान की आंठवी अनुसूची में शामिल की गई किसी भी एक भारतीय भाषा का चुनाव करना होगा)

PAPERSUBJECTMARKS
PAPER 1:- Essay 250Essay 250
PAPER 2:- जनरल स्टडीज-1 जनरल स्टडीज-1 (भूगोल)250
PAPER 3:-जनरल स्टडीज 2 ( समाजिक न्याय और अंतरराष्ट्रीय सम्बंद)250
PAPER 4:- जनरल स्टडीज 3 (इकॉनमी डेवलपमेंट , बायो डायवर्सिटी , सुरक्षा और आपदा प्रबंधन )250250
PAPER 5:- जनरल स्टडीज 4 (आचार नीति , अखंडता , एप्टीट्यूड) 250
PAPER 6:- OPTIONAL ऑप्शनल सब्जेक्ट पेपर 1250
PAPER 7:- OPTIONALऑप्शनल सब्जेक्ट पेपर 2250
लिखित परीक्षा का कुल योग =1750
interview275
TOTAL MARKS -कुल अंक 2025

यह भी पढ़े=Top 5 free email marketing tools

ऑप्शनल सब्जेक्ट :-

उम्मीदवार एग्रिकल्चर , मानव विज्ञान, बॉटनी, केमिस्ट्री , सिविल इंजीनियरिंग, कॉमर्स और एकाउंटेंसी ,एनिमल हस्बेन्ड्री और वेटनरी साइंस , भूगोल, भू विज्ञान, इतिहास, लॉ, मैनेजमेंट ,मेकेनिकल इंजीनियरिंग, मेडिकल साइंस, फिलॉसफी समाजशास्त्र, स्टेटिस्टिक्स, जूलोजी, और भाषा आदि में से किसी भी एक सब्जेक्ट का चुनाव कर सकते है।

interview-

मेन एग्जाम होने के बाद उम्मीदवारों को personal interview के लिए बुलाया जाता है। यह interview लगभग 45 मिनट का होता है। interview के बाद मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है। मेरिट लिस्ट बनाते समय qualifying paper के नम्बर नही जोड़े जाते।

INTERVIEW OF IPS OFFICER

UPSC exam clear करने के अलावा state PSC exam pass करके भी IPS officer बना जा सकता है। state level का exam pass करने के बाद SP बनने में 8 से 10 साल का समय लगता है।

Training:-

उम्मीदवारों को 1 साल की training के लिए मसूरी और फिर हैदराबाद भेजा जाता है। भावी पुलिस अधिकारिओ को भारतीय दंड संहिता, स्पेशल लॉ और क्रिमिनोलॉजी क(special law एंड criminology) की training दी जाती है। Officers को Physical training भी दी जाती है।

उम्मीद है आपको हमारा ये article अच्छे से समझ आया होगा।

BEST OFF PAGE SEO TIPS IN HINDI 2020:

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best off page seo
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BEST OFF PAGE SEO TIPS IN HINDI 2020 :


Off page SEO का पूरा काम Blog के बाहर का होता हैं। इसमे हमे अपने Blog का promotion करना होता हैं। जैसे कई popular websites में जाकर उनके contant पर comments करना , अपनी website का link submit करना , इसे हम backlink कहते है। Backlink से website को बहुत फायदा होता है।
Facebook , Twitter ,Quora पर अपने blog का attractive page बनाये । इससे आपके website में ज्यादा visitors बढ़ने के chances होते है।

जो famous बड़े बड़े blogs है , उनके blog पर guest post submit करीए इससे उनके blog पे आने वाले visitors आपको जानने लगेंगे और आपकी website पर traffic आने लगेगा।

यह भी पढ़े– WHAT IS ON PAGE SEO

HOW TO DO Off-page : BEST OFF PAGE SEO कैसे करे?

TOP BEST off page seo strategy:

(1)Search Engine Submission (सर्च इंजन सबमिशन):- सारे search engine में अपनी website को सही तरीके से submit करना चाहिए।

(2) Bookmarking(बुकमार्किंग) :- अपनी website या blog की post या page को bookmarking वाली website में submit करना चाहिए।

(3)Directory Submission(डायरेक्टरी सबमिशन) :- अपनी website को popular high PR वाली Directory में submit करना चाहिए।

(4) Social Media(सोशल मीडिया):- social media पर profile बनाना चाहिए और अपनी website की link को ad कर दे ।

(5) Classified Submission(क्लासिफाइड सबमिशन):- Free Classified Website में जाकर अपनी Website का Free में Advertise करना चाहिए।

(6) Q &A Site :- आप question एंड answer वाली website में जाकर कोई भी question पूछ सकते हो और अपनी website का link लगा सकते हो।

(7) Pin(पिन):- अपनी website की images को pinterest पर post कर सकते है । यह बहुत अच्छा तरीका है traffic increase करने का।

(3) BEST OFF PAGE LOCAL SEO


अगर आपके पास एक local business हो , जैसे कि एक shop, जहाँ के लोगो का आपके यह अक्सर आना जाना हो , तब ऐसे में आप अपनी website को optimize करते है कुछ ऐसे की जिससे real life में भी लोग आपके पास आसानी से पहुँच सके।

यदि आप केवल अपने ही किसी local area को target करते है और उसी के according आप अपनी site को SEO Optimize करते है । तब इस प्रकार के SEO को ही “Local SEO” कहा जाता है।

Difference Between SEO and Internet Marketing (SEO और Internet marketing में क्या difference है?)

BEST OFF PAGE SEO बहुत से लोग SEO और internet marketing को लेकर बहुत confuse होते है। उन्हें लगता है कि ये दोनो same है। लेकिन इस नही है, SEO एक प्रकार का tool है । इसे internet marketing का हिस्सा भी कह सकते है। इसके इस्तेमाल से internet marketing को कर पाना बहुत ही आसान होता है।

Difference between SEO and SEM ( SEO और SEM में क्या अंतर है?)

SEO या Search Engine Optimization एक ऐसा process है , जिसके द्वारा एक blogger अपनी website को इस तरह optimize करता है जिससे वह अपने blog के article को search engine में rank कर सके और वह से अपने blog पर traffic ला सके।

SEM या Search Engine Marketing इस process है , जिसके द्वारा आप अपने blog को search engine में ज्यादा visible बना सकते है, जिससे आपकी website पर ज्यादा traffic आये । फिर चाहे वो free traffic (SEO) हो या paid traffic( Paid search advertisement).

BEST off page seo techniques SEO के बारे में जानकारी :

अगर आपका कोई blog या website है तो आपको Basic SEO के बारे में तो जरूर पता होगा कि ये जैसे काम करता है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी है जिन्हें basic SEO के बारे में जानकारी नही है। इसलिए हम आपको कुछ important best off page SEO terms के बारे में जानकारी देंगे । जिससे कि आपको इसके बारे में पता चले।

(1) Backlink:- इसे inlink या simply link भी कहा जाता है। यह एक hyperlink होता है। किसी दूसरे website में जो कि आपकी website के ओर इशारा करता है। Backlink SEO के नज़रिए से बहुत ही important होता है, क्योंकि यह किसी भी webpage की search ranking को directly influence करता है।


(2) Page rank:- Page rank एक algorithms है। जिसे Google इस्तेमाल करता है, ये अनुमान लगाने के लिए की web में कौन -कौन सी relative important pages मौजूद है।


(3) Title Tag:- Title tag किसी भी webpage का title होता है और ये बहुत ही important होता है Google search algorithms के लिए।


(4) Meta Tag:- Title tag के जैसे ही meta tag का इस्तेमाल से search engine को ये पता लगता है कि pages में contant में क्या स्थित है।


(5)Search algorithms:- इसकी मदद से हम ये पता लगा सकते है कि पूरे internet में कौन सी web pages relevant है। Google के search algorithms में लगभग 200 algorithms काम करती है।


(6) Keyword Density:- इससे ये पता चलता है कि कितनी बार कोई keyword article में कितनी बार इस्तेमाल की गई है।


(7) Keyword Stuffing:- अगर कोई keyword को जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया जाए तो उसे ही keyword stuffing कहते है। ये negative SEO होता है क्योंकि इससे आपके blog पर खराब असर पड़ता है।

What is organic and inorganic results?( organic और inorganic result क्या होते है?)

SERP (Search Engine Result Page) पर ये दो तरह की listings होती है।
(1)organic (2)inorganic

इसमे inorganic listing के लिए हमे Google को पैसे देने पड़ते है। यानी कि ये paid होते है ।

organic listing पूरी तरह से free होती है यानी कि बिना पैसे दिए हम google के top page पर भी आ सकते है। लेकिन इसके लिए आपको पहले SEO करना होता है।

तो यह थी SEO से जुड़ी जानकारी , हमारी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद ।

WHAT IS SEO – BEST SEO TIPS IN 2020

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WHAT IS SEO – BEST SEO TIPS IN HINDI 2020

SEO एक ऐसा तकनीक है , जिसके द्वारा हम अपने Page को Search Engine में Top में ला सकते हैं। Search Engine क्या हैं? यह तो हम सब ही जानते हैं । Google दुनिया का सबसे Popular Search Engine है। इसके अलावा भी कई search engine मौजूद है जैसे:- Yahoo, Bing आदि। SEO की मदद से हम अपने Blog को search engine पर no. 1 position पर ला सकते हैं।
जैसे हम Google में जाकर कुछ Key Word Type करते है तो उस keyword से related जितने भी contant होते हैं वो सब google पर दिख जाते है। ये contant जो हमे दिखते हैं वो सभी अलग अलग ब्लॉग से आते हैं।

और जो result हमे सबसे top में यानी कि सबसे ऊपर दिखाई देता हैं , वो Google में no.1 rank पर होता हैं , तभी वो सबसे ऊपर दिखाई देता हैं। जो contant top पर होता हैं उसका मतलब यह है की उस Blog में SEO का अच्छे तरीके से इस्तेमाल किया गया है , जिससे कि उसमे ज्यादा से ज्यादा visitors आते है, इसी वजह से वो Blog मशहूर हो गया हैं।

SEO हमारे Blog को Google में no.1 rank पर लाने में सहायता करता हैं। SEO एक ऐसी तकनीक है , जो आपकी Website को Search Engine के search result पर सबसे ऊपर रखती हैं, जिससे कि उसमे Visitors की संख्या बढ़ सके।

आपकी Website search result में सबसे ऊपर होतो internet user सबसे पहले आपकी site में ही visit करेगा , जिससे आपकी site में ज्यादा से ज्यादा traffic की संभावना बढ़ जाती हैं और आपकी earning भी अच्छी होने लगती हैं।

FULL FORM OF SEO( SEO का फुल फॉर्म क्या है?)

SEO का फुल फॉर्म है “Search Engine Optimization”. (सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन).

आज की इस पोस्ट में हम आपको SEO के बारे में बताएंगे।

WHAT IS SEO :SEO क्या हैं?
SEO Blog के लिए क्यों जरूरी होता हैं? ये सवाल अक्सर नए Bloggers को परेशान करता हैं । आज के इस Digital युग मे अगर आपको लोगो के सामने आना है तो Online ही एक मात्र रास्ता है , जिसके जरिये आप एक साथ करोड़ो लोगो के सामने अपनी बात रख सकते है।
या तो आप Vedio के माध्यम से अपनी बात लोगो के सामने रख सकते हैं या फिर अपने content के द्वारा आप अपनी बात लोगो तक पहुचा सकते है।

लेकिन अपने Contant को ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुचाने के लिए अपने contant को आपको search engines के first page पर लाना होगा , क्योंकि यही वो pages हैं जिन्हें visitors ज्यादा पसंद करते हैं और जिन पर ज्यादा Trust भी करते हैं।लेकिन यहां तकAANA इतना आसान नही है क्योंकि इसके लिए आपको अपने Contant को सही तरीके से Optimized करना होगा । जिससे वो Search Engine में Rank हो सके, इसकी प्रक्रिया को ही SEO कहते हैं।

Blogging के लिए बहुत जरूरी होता है SEO, क्योंकि आप चाहे कितना अच्छा ही contant लिख ले , अगर आपकी Article सही तरीके से rank नही हुई है तो उसमे Traffic ना के बराबर आएगा । ऐसे मे writer की महेनत बेकार हो जाएगी। इसलिए अगर आप Blogging को लेकर serious है तो आपको SEO के बारे में जानकारी जरूर रखनी चाहिए। SEO का वैसे तो कोई Rule नही होता , ये कुछ Google Algorithms के ऊपर आधारित है और वो निरन्तर change होता रहता है। लेकिन फिर भी Google SEO Guide के कुछ Fundamental है जो कि हमेशा एक जैसे होते है। इसलिए जरूरी है कि Bloggers खुद को हमेशा नए SEO तकनीक से Update रखे। इससे आपको Market में चल रहे Trends के बारे में पता रहेगा जिससे आप अपने Article में जरूरी बदलाव ला सकते हैं जो कि बाद में आपको rank करने में मदद मिलेगी।

तो आइए अब हम आपको SEO के बारे में पूरी जानकारी देते हैं।

WHAT IS SEO:SEO हमारे Blog के लिए क्यों जरूरी है?

मान लीजिये की मेने एक website बनाई , उसमे अच्छे – अच्छे high quality contant publish कर दिए लेकिन अगर मैने SEO का इस्तेमाल नही किया तो मेरी website लोगो तक नही पहुच पाएगी और मेरी website बनाने का कोई मतलब नही रहेगा ।

SEO का अगर हम इस्तेमाल नही करेंगे तो , जब भी कोई user कोई keyword search करेगा तो , आपकी website में उस keyword से related अगर कोई contant है,,तो user आपकी website को access नही कर पायेगा क्योंकि search engine हमारी site को ढूंढ नही पायेगा ना ही हमारी website के contant को अपने database पर store कर पायेगा, जिसकी वजह से आपकी website पर traffic होना बहुत मुश्किल हो जाएगा।

SEO को सीख लेने के बाद , जब आप उसका इस्तेमाल अपने Blog के लिए करेंगे , तो उसका result तुरन्त नही दिखेगा । इसके लिए आपको धैर्य रख कर अपना काम करते रहना होगा।

जैसा कि पहले ही हमने बता दिया कि , कैसे ranking के लिए और traffic के लिए SEO क्यों जरूरी है । तो अब हम आपको search engine optimization के importance के बारे में और अधिक बताते हैं।

ज्यादातर लोग internet में search engine का इस्तेमाल अपने सवालो के जवाब पाने के लिए करते हैं। ऐसे में वो search engine द्वारा दिखाए गए top result पर ही ध्यान देते है। ऐसे में अगर आप भी अपने blog को rank करना चाहते है तो SEO की मदद लेनी होगी।


SEO केवल search engine के लिए नही होता बल्कि अच्छे SEO practice के होने से ये user experience को बढ़ाने में मदद करता है और आपकी website की usability भी बढ़ाता है।
SEO आपकी site के social promotion के लिए भी बहुत जरूरी होता हैं क्योंकि जो लोग आपकी site को google जैसे search engine में देखते है , तब वो ज्यादातर उन्हें अपने social media जैसे facebook , twitter पर share जरूर करते हैं।

SEO आपकी site को किसी भी competition में आगे रहने में मदद करता हैं जैसे कि अगर 2 website समान चीजे बेच रही है, तब जो website SEO Optimized होती है, वो ज्यादा customers को अपनी ओर खींचती है और उनकी sales भी बढ़ जाती है। वही दूसरी site उतना नही कर पाती है।

TYPES OF SEO IN HINDI (SEO के कितने प्रकार होते है?)

WHAT IS SEO AND ITS TYPE :SEO के दो प्रकार होते है।
(1) Onpage SEO
(2) Offpage SEO


इन दोनों के काम बिल्कुल अलग -अलग होते हैं। आइये अब हम इनके बारे में जानते हैं।

(1) Onpage SEO :- इसका काम आपके blog में होता हैं , इसका मतलब है की ऊनी website को सही ढंग से design करना।

SEO के rules को follow कर अपने website में template का इस्तेमाल करना , अच्छे contant लिखना और उनमें अच्छे keywords का इस्तेमाल करना , जो search engine में सबसे ज्यादा search किये जाते हैं।

अपने contantमें keywords का इस्तेमाल सही जगह करना जिससे Google को जानने में आसानी हो कि आपका contant किस topic पर लिखा गया है । और जल्दी आपकी website को Google page पर rank करने में मदद करता हैं।

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BEST WORDPRESS SEO PLUGIN IN 2020:

HOW TO DO ON PAGE SEO: Onpage SEO कैसे करे?

यहाँ पर हम आपको कुछ ऐसे techniques के बारे में बताएंगे जिनकी मदद से हम अपने website या blog को Onpage SEO अच्छे तरीके से कर सकेंगे

(1) Website Speed(वेबसाइट स्पीड):
आपके blog के लिए website speed बहुत ही महवपूर्ण कड़ी होती है। एक servey में पाया गया है की कोई भी visitor ज्यादा से ज्यादा 5 से 6 seconds ही किसी blog पर रहता है। अगर वो इसी समय के अंदर नही खुला , तब वो उस website को छोड़ के दूसरे पर Migrate हो जाता है। अगर आपका blog नही खुला तो एक negative signal google के पास पहुच जाता है कि ये blog अच्छा नही है या ये ज्यादा fast नही है। तो जितना हो सके ऊनी site की speed अच्छी रखे।

अब हम आपको कुछ important tips देते है, जिससे आप अपनी website या blog की speed fast कर सकते हैं।

(1)Attractive और simple theme का इस्तेमाल करे।
ज्यादा plugins का इस्तेमाल न करे।
Image का size कम से कम रखे।
W3 Total cache और WP super cache plugins का इस्तेमाल करे।

(2) Website की Navigation(वेबसाइट की नेविगेशन)
अपनी वेबसाइट या blog में visit करना आसान होना चाहिए। जिससे कोई भी visitors और google को एक page से dusre page पर जाने में कोई दिक्कत न हो।

(3)Title Tag(टाइटल टैग)
अपनी website में title tag बहुत ही अच्छा बनाते , जिससे कोई भी visitor उसे पढ़े , तो जल्द से जल्द उस title पर click कर दे । इससे आपका CTR भी increase होगा।

आपने title tag को अच्छा कैसे बनाये:- जाने title में 65 words से ज्यादा वर्ड्स का इस्तेमाल नही करे क्योंकि Google 65 words के बाद गूगल searches में title tag show नही करता हैं।

(4) post का URL कैसे लिखे:-
जितना हो सके ,हमेशा अपने post का URL छोटा और simple रखे।

(5) Internet Link
ये आपकी post को rank करने का एक बहुत ही अच्छा तरीका है । इससे आप अपने Related pages को एक दूसरे के साथ Interlinking कर सकते हैं। इससे आपके interlinking pages आसानी से rank हो सकते हैं।

(6)ALT Tag
अपने blog के post में हमेशा images का जरूर इस्तेमाल करे , क्योंकि images से आप बहुत सारा traffic पा सकते हैं इसलिए images का इस्तेमाल करते time उसमे ALT Tag जरूर लगाएं।

(7) keyword , contant और heading
हमेशा अपने contant कम से कम 800 words से ज्यादा के लिखे । इसमे आप पूरी जानकारी दे सकते है और ये SEO के लिए भी बहुत अच्छा है। और यह ध्यान रखिये कभी भी किसी के contant copy न करे।

अपने article के heading का खास ख्याल रखे क्योंकि इससे SEO पर काफी impact पड़ता हैं। Article का title तो H1 होता हैं और इसके बाद से sub heading को H2 ,H3 आदि से नामांकित कर सकते हैं।
आप article लिखते समय LSI keyword का इस्तेमाल करे । इससे आप लोगो के searches को असांज से link कर सकते है। आप important keyword को Bold करे जिससे कि Google और Visitors को ये पता चले कि ये जरूरी keyword है , और उनका ध्यान इसकी तरफ आकर्षित होगा।

उम्मीद है आपको हमारा ये article अच्छे से समझ आया होगा। Please share this post if you like it

CEO OF APPLE COMPANY- APPLE

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ceo of apple

WHO IS THE CEO OF APPLE COMPANY ? (एप्पल कंपनी का सीईओ हैं?)

आज की इस पोस्ट में हम आपको बताएंगे कि एप्पल कंपनी का सीईओ (CEO) कौन है?

उनका जन्म कब हुआ?

उन्होंने CEO बनने से पहले कहा काम किया हैं? आदि ।

तो आइए अब हम आपको बताते हैं Apple Company के CEO के बारे में।

सबसे पहले आपको बता दे कि CEO का फुल फॉर्म क्या होता हैं?

CEO का फुल फॉर्म होता हैं:- Chief Executive Officer

Apple के CEO का नाम है :- टिम कुक(Tim Cook)

टिम कुक का पूरा नाम टिमोथी डॉनल्ड कुक (Timothi Donald Cook) है।

उनका जन्म 1 नवंबर 1960 में हुआ था।

यूकारी इवाटनी केन की किताब ‘हॉन्टेड ईम्पायर:- एप्पल ऑफ्टर स्टीव जॉब्स’ के मुताबिक टिम कुक ने पहली नोकरी अखबार बेचने के तौर पे की थी । वह लोगो के घर पर अखबार पहुचाया करते थे । टिम कुक पिछले 9 साल से Apple Company के CEO है। टिम कुक ने कई सालों तक फार्मेसी (pharmacy) में भी काम किया था । टिम कुक ने ऑबर्न विश्विद्यालय से औद्योगिक इंजिनीयरिंग में स्नातक डिग्री हासिल की और ड्यूक विश्विद्यालय के फुक्वा स्कूल और बिज़नेस से MBA किया। IBM में 12 साल सेवा देने के बाद के carrier के बाद टिम कुक ने 1998 में एप्पल का दामन थामा।

TIM COOK 2000 में Apple Company के Sales और Management Department के Vice President बने।
इसके बाद 2004 में मैकिंटोश डिवीज़न के अंतरिम CEO और प्रमुख पद पर भी मौजूद रहे।

2009 में कुक की खराब सेहत के कारण छुट्टी पर गए थे तब ही स्टीव जॉब्स ने उन्हें अंतरिम CEO बनाने की घोषणा की थी।

अगस्त 2011 में स्टीव जॉब्स की मृत्यु के बाद TIM COOK को Apple Company का CEO बनाया गया। साल 2011 का वह अगस्त का महीना ही था , जब स्टीव जॉब्स ने खुद टिम कुक को फ़ोन किया था।

साल 2018 में टिम कुक को 84 crore रुपए bonus के रूप में मिले थे।

टिम कुक सेहत को लेकर बहुत सजग रहते थे ।
TIM COOK अपनी तंदरुस्ती के लिए भी जाने जाते हैं। बिज़नेस इनसाइडर की report के मुताबिक टिम कुक सुबह 3:45 बजे सोकर उठ जाते हैं। इसके बाद वह सुबह 5 बजे के करीब जिम जाते है। टिम कुक मीठा खाने से परहेज करते हैं। इसके बाद वह 8 बजे करीब 800 ई-मेल पर नज़र डालते हैं। एक बार उन्होंने कहा था कि आफिस से देर से घर जाने वालों की लिस्ट में वे भी है।

Jeff bezzos -Amazon| networth| children|-Biography

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jeff bezzos ceo of amazon

Jeff bezzos -Amazon|networth|children|-Biography-

Jeff bezzos CEO OF AMAZON इस पोस्ट में हम आपको amazon के CEO के बारे में बताएंगे। Amazon के बारे में तो हम सबको पता ही हैं । Amazon से हम grocery, electrical product, clothes, shoes, jwellery आदि को purchase करते हैं । और Amazon से किसी को money transfer भी कर सकते हैं । Amazon से हम घर बैठे shopping कर सकते हैं। कोई भी festival हो Amazon पर कई तरह के offers आते हैं , cash back मिलता हैं और भी कई फायदे मिलते हैं । यह सब फायदे देने का निर्णय या और भी कुछ बदलाव जैसे company को दिशा निर्देश देना आदि यह सब काम company के CEO के होते है।

तो आइये अब हम आपको बताते है AMAZON COMPANY के CEO के बारे में।

JEFF BEZZOS OWNER /CEO OF AMAZON BIOGRAPHY

Amazon कंपनी के CEO का नाम “जेफ बेज़ोस” हैं।

उनका जन्म 12 जनवरी 1964 में अल्बुकर्क , न्यू मेक्सिको में हुआ था।

उन्होंने प्रिंसटन विश्विद्यालय (विज्ञान स्नातक) से शिक्षा प्राप्त की।

उनका व्यवसाय amazon.com के संस्थापकनौर मुख्य कार्यपालक अधिकारी है।

Jeff bezzos amazon. com के संस्थापक , अध्यक्ष, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और amazon. com के अध्यक्ष हैं। यह Forbes की 2018 की लिस्ट के अनुसार JEFF BEZZOS World Richest man दुनिया के सबसे अमीर आदमी है। jeff bezzos princetone university से graduate है और उन्हें टाऊ बेटा पि नामक प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुका हैं। जेफ़ बेज़ोस ने 1994 में amazon कज स्थापना करने से पहले डी. ई.शॉ और company के लिए वित्तिय विश्लेषक का कार्य किया। और वह अपने पशु -फार्म पर कार्य करने लगे, जहाँ उन्होंने अपनी जवानी की ग्रीष्मकालीन छुट्टियां अपने नानाजी के साथ कार्य करते हुए बिताई थी। वह यह पशु फार्म के परिचालक से सम्बंधित कार्य किया करते थे। जब वह छोटे थे , तब से ही उन्होंने यांत्रिकी कार्यो के प्रति जबरदस्त योग्यता दिखाई और जब वह बच्चे थे तभी उन्होंने पेचकस से अपना पालना खोलने की कोशिश की थी।

जेफ बेज़ोस के जन्म के समय उनकी माता ‘जैकी’ खुद एक किशोरी थी और उनका जन्म अल्बुकर्क , न्यू मेक्सिको में हुआ था । बेज़ोस के पिता के साथ उनका विवाह 1 वर्ष से भी कम चला । जब जेफ बेज़ोस 5 वर्ष के थे तब उनकी माता ने दूसरा विवाह मिगुअल बेज़ोस के साथ कर लिया था। मिगुअल का जन्म क्यूबा में हुआ था और वह 15 साल की उम्र में अकेले ही अमेरिका चले गए थे। और अपनी महेनत के बल पर वह अल्बुकर्क विश्विद्यालय तक पहुच गए थे। शादी के बाद पूरा परिवार ह्यूस्टन , टेक्सास चला गया था। और मिगुअल यहां एकसोन नामक company में इंजीनियर बन गए।

यह भी पढ़े-CEO की salary कितनी होती हैं?

जेफ बेज़ोस ने कम उम्र में ही विविध वैज्ञानिक वस्तुओ में apna intrest dikhaya। उन्हीने अपनी व्यक्तिगतता बनाये रखने के लिए और अपने छोटे भाई बहनों को अपने room से दूर रखने के लिये , एक alarm गुप्त रूप से अपने कमरे में लगा दिया। फिर उन्होंने अपने माता पिता का गेराज को अपनी विज्ञान परियोजनाओं के लिए एक प्रयोगशाला में बदल दिया। उसके बाद य परिवार मियामी , फ्लोरिडा चला गया । मियामी जाकर बेज़ोस ने मियामी सीनियर हाई स्कूल में अध्धयन किया । जब वह उच्च विद्यालय में थे , तब उन्होंने फ्लोरिडा विश्विद्यालय से छात्र विज्ञान प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। इस प्रशिक्षण का लाभ उन्हें 1982 में मिला जब उन्हें सिल्वर नाईट पुरस्कार ने नवाजा गया। फिर उन्होंने प्रिंसटन विश्विद्यालय में भौतिक विज्ञान का अध्यन करने के लिए प्रवेश लिया , लेकिन जल्द ही वे उससे उकता गए और फिर से उन्होंने computer की ओर रुख मोड़ लिया और फिर उन्होंने electrical engineering एयर computer विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की । 2008 में बेज़ोस को कनेर्गी मेलोन विश्विद्यालय से विज्ञान और प्रौद्योगिकी में मानद डॉक्टर की उपाधि से सम्मानित किया गया।

तो ये थी पूरी जानकारी जेफ बेज़ोस की उम्मीद करता हु आपको हमारी पोस्ट अच्छे से समझ आई हो । पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद।

What is the full form of C.E.O.? – educationbucket

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FULL FORM OF CEO

What is the full form of C.E.O.-

FULL FORM OF CEO (CEO की फुल फॉर्म क्या है?)

The full form of CEO:- Chief Executive Officer (मुख्य कार्यकारी अधिकारी)

WHAT IS CEO? (CEO क्या है?)

CEO यदि आप किसी company या संस्था मे नौकरी करते होंगे , तो अपनी ऊपर वाली post या position पर जाने की जरूर सोचते होंगे, क्योंकि यह एक साधारण सी बात है , हर व्यक्ति चाहता है कि वह अपनी से ऊँची post पर हो , और बहुत से लोग तो ये भी सोचते हैं कि वह अपने boss की position पर हो। तो आइए इस post में हम आपको बताते है कि what is CEO । CEO के बारे में जानने के लिए आप अंत तक हमारी post को पढ़िए।

अगर CEO की बात करे तो यह किसी company या संस्था का सबसे बड़ा पद होता हैं । उसी के नीचे सभी employees काम करते हैं। CEO company का मुख्य अधिकारी या उसका कर्ता धर्ता होता हैं। उसी के हाथ मे होता हैं किस तरह compnay को चलाना हैं। CEO company के सभी अहम फैसले लेता है , जिससे company की growth हो सके। बहुत सी company में एक MD (managing director) का पद भी होता हैं उसे भी CEO के बराबर ही माना जाता हैं। company या organisation को किस दिशा में लेकर जाना हैं इसका कार्यभार भी CEO का ही होता हैं |

जैसे:- किस company के साथ partnership करना profitable होगा आदि। ऐसे बड़े – बड़े फैसले CEO ले द्वारा लिए जाते हैं।

CEO:- Chief Executive Officer (मुख्य कार्यकारी अधिकारी)

हम आपको कुछ लोकप्रिय CEO के बारे मे बताएंगे जिसके बारे में आपको पता होना चाहिए।

(1)CEO Of Google – Sunder Pichai (सुंदर पिचाई)
(2)CEO Of Apple – Tim Cook(टिम कुक)
(3)CEO Of Infosys- Salil Parekh (सलिल पारेख)
(4)CEO Of Amazon- Jeff Bezos(जेफ़्फ़ बेज़ोस)
(5)CEO Of Facebook- Mark Zukerberg(मार्क जुकरबर्ग)
(6)CEO Of TCS – Rajesh Gopinathan(राजेश गोपीनाथन)

Quality of CEO ?

CEO बनने के लिए आपके आपके अंदर अपने employees को एक साथ करके रखना , कंपनी के लिए बड़े फैसले लेना, team को दिशा निर्देश देना,अपने विचारो को लोगो तक सही तरीके से पहचाना और लोगो को अपनी तरफ attract(आकर्षित) करना, कठिन समय मे सही निर्णय लेना आदि quality आप मे होना चाहिए क्योंकि यही वह quality है जो आपको धीरे -धीरे CEO के पद तक पहुचती हैं।

HOW TO BECOME A CEO?(CEO कैसे बनते हैं?

CEO company या organisation का सबसे पद अधिकारी होता हैं। CEO बनने के लिए आप मे बहुत सी quality होनी चाहिए । CEO के पद तक पहुचने के लिए आपको एक – एक कदम आगे भड़ाना होगा । इसके बाद अगर कभी board of director को आपका काम पसन्द आया तो वह आपको company का CEO बना देगा । CEO बनने के लिए quality और company कैसे चलाते है उसकी knowledge तो होनी ही चाहिए , लेकिन इसके साथ साथ आपको CEO बनने के लिए MBA करना भी। बहुत अच्छा होता हैं। इसमे आपको business से जुड़ी सभी जानकारी के बारे में सिखाया जाता हैं।

WORK OF CEO (CEO के कार्य)?

CEO के कार्य बहुत ही जिम्मेदारी वाले होते है और यह बस board of director के लिए ही जवाबदेह होते है। इसे company के लाभ (profit) के लिए बड़े – बड़े निर्णय लेना होता हैं और company के लिए Market Strategy बनाना होता हैं और भी बहुत सारे काम होते हैं जो इस post पर एक CEO को करना होते हैं।

CEO की salary कितनी होती हैं?

CEO की salary इस बात पर निर्भर करती हैं कि वह किस company का CEO है । अगर कोई बड़ी company का CEO है , तो उसकी salary crore में होगी और अगर कोई छोटी company का CEO है तो उसकी salary lakh में हो सकती हैं या उससे ज्यादा या कम। CEO किस company का हैं उससे ही उसकी salary का पता लगाया जा सकता है।

  • CEO बनने के 5 tips:-
  • (1)Get the Qualification
    (2)Develop the Right skills
    •Leadership skills
    •Business acumen
    •Decision-making stress Management
    •Resourcefulness
    •Self-confidence
    (3) Take risks
    (4) Make Valuable Connections
    (5) Be Realistic

उम्मीद है आपको हमारा ये article अच्छे से समझ आया होगा।

what is trp and how it is calculated – trp kya hai in hindi?

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what is trp and how it is calculated – trp kya hai in hindi?

WHAT IS trp Full Form in Hindi -TRP क्या होता है

TRP की FULL FORM Television Rating Point होती है. यह एक उपकरण है जो एक Television कार्यक्रम की लोकप्रियता को प्रकाशित करता है. इसका उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि कौन सा Television कार्यक्रम सबसे अधिक देखा जाता है. TRP लोगों की पसंद का एक सूचकांक देता है और विशेष कार्यक्रम की लोकप्रियता को दर्शाता है. यह उच्च टीआरपी के साथ एक program प्रकाशित करता है कि कार्यक्रम को बड़ी संख्या में दर्शकों द्वारा देखा जाता है. विज्ञापनदाताओं के लिए इसका डेटा बहुत उपयोगी है क्योंकि वे उच्च TRP वाले कार्यक्रमों के दौरान अपने विज्ञापन देते हैं.

  • TRP Full Form in Hindi, TRP Ka Full Form Kya Hai?
  • TRP का Full Form क्या है,
  • TRP Ka Poora Naam Kya Hai
  • TRP का पूरा नाम और HOW IS IT CALCULATED
  • TRP से टीवी channel की income कैसे होती है
  • सभी सवालों के जबाब आपको इस Post में मिल जायेंगे.

TV सीरियल और चैनल का TRP चेक करने के लिए कुछ जगह पर People’s Meter लगाये जाते है. यह एक विशिष्ट आवृत्ति के द्वारा ये पता लगाते है की कहा कौन सा serial या channel देखा जा रहा है और कितने बार advisement दिख रहा है. People’s Meter के द्वारा Television एक-एक मिनट की खबर को Monitoring टीम Indian Television Audience Measurement तक पंहुचा दिया जाता है. Monitoring टीम Indian Television Audience Measurement People’s Meter से मिले खबर को analysis करने के बाद यह तय करता है की किस चैनल या किस सीरियल का TRP कितना है.

अगर किसी चैनल का TRP कम या ज्यादा है तो इसका प्रभाव सीधे चैनल की कमाई पर पड़ता है. जैसे कि Sony, Star, LifeOK, Discovery और जितने चैनल है सभी विज्ञापन के द्वारा ही पैसे कमाते है. ऐसे मे अगर किसी चैनल का TRP कम है तो उसको विज्ञापन के ज्यादे पैसे नहीं मिलेंगे या फिर बहुत कम विज्ञापनदाता मिलेंगे. और इसके ठीक उल्टा अगर किसी चैनल का TRP ज्यादा होगा तो उसे ज्यादा पैसा मिलेगा विज्ञापनदाता के द्वारा. TRP केवल चैनल ही नही किसी विशेष सीरियल या Show पर भी निर्भर करता है.

WHAT IS TRP AND HOW IS IT CALCULATED -TRP की गणना कैसे की जाती है?


INTAM आज के समय में एकमात्र एजेंसी है जो TRP की गणना के क्षेत्र में काम कर रही है. यह दो तरीकों पर काम करती है.

  • Frequency Monitoring Method
  • Picture Matching Technique

Frequency Monitoring Method
Frequency Monitoring Method में TRP को Calculate करने के लिए A डिवाइस को जज करने के लिए कुछ हजार दर्शकों के घरों के टीवी सेट से जुड़ा हुआ है. इस डिवाइस को पीपल्स मीटर कहा जाता है और यह वह समय और प्रोग्राम Record करता है जिसे दर्शक किसी विशेष दिन देखते है. इसके बाद दर्शकों की स्थिति जानने के लिए औसतन 30 दिन की अवधि ली जाती है. यह Peoples मीटर एक बहुत महंगा उपकरण है जिसे विदेशों से आयात किया जाता है.

Picture Matching Technique
इस तकनीक में Peoples मीटर लगातार उस तस्वीर के एक छोटे से हिस्से को रिकॉर्ड करता है जिसे एक विशेष टेलीविजन सेट पर देखा जाता है. इसके बाद नमूना घरों से डेटा एकत्र किया जाता है और राष्ट्रीय रेटिंग की गणना करने के लिए उपयोग किया जाता है. यह तकनीक भारत में अधिक विश्वसनीय और तुलनात्मक रूप से नई है.

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WHAT IS EMAIL MARKETING ?
TRP से टीवी chanel की income कैसे होती है ?


दोस्तों आपकी जानकारी के लिये हम आपको बताना चाहेंगे सभी चैनल की 90% कमाई विज्ञापन से ही होती है और ये विज्ञापन हर programme के एक दो तीन मिनिट के ब्रेक में आते हैं. कोई भी विज्ञापनदाता किसी chanel पर अपना विज्ञापन दिखाने के लिए बहुत ज्यादा पैसे चैनल वालों को देते हैं इस तरह इन चैनल की अधिकतर कमाई आपको दिखाए जा रहे विज्ञापन से ही होती है. दोस्तों जिस chanel की TRP जितनी ज्यादा होती है वह channel अपने prpogramme के बीच में यानी breake में विज्ञापन दिखाने के लिए विज्ञापन वालों से उतने ही ज्यादा पैसे लेते हैं.

example के तौर पर मान लीजिये अगर आप किसी TV Chanel पर अपने किसी भी प्रोडक्ट का Advertisement करना चाहते है तो आप किसी High TRP वाले Serial जैसे की Nagin या The Kapil Sharma Show को ही आपने प्रोडक्ट का Advertisement करने के लिए चुनोगें और जब आप आपने Advertisement करने के लिए इन High TRP वाले Serial को चुनोगें तो आपको ज्यादा पैसे भी भुगतान करने पड़ेंगे दुसरे किसी Low TRP वाले Serials की तुलना में.|

और अंत में ये कहना चाहता हु की अगर आप लोगो को ये content पसंद आया तो हमारी post को शेयर करिए अगर आप इस तरह के amazing content चाहते है तो हमे subscribe कीजिये

WHAT IS EMAIL MARKETING – Email marketing kya hai in hindi 2020

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what is email marketing

WHAT IS EMAIL MARKETING – Email marketing kya hai in hindi 2020 –

email marketing is the one of the most effective ओर सबसे पुराना तरीका है email marketing digital marketing startegies में से एक तरीका है यह पोस्ट उन लोगो को लिए है जो सोच रहे है कि हम भी ईमेल मार्केटिंग करे लेकिन स्टार्ट कैसे करे no problem (educationbucket.com) पर आपको पूरी जानकारी दी जाएगी

  • Email marketing kya hai in hindi –
  • How to get started
  • HOW TO CREATE TARGETED AUDIENCE WITH EMAIL MARKETING -EMAIL MARKETIING SE TARGETED AUDIENCE KESE BNAYE –
  • Automated email marketing Why email marketing and its benifit
  • Top 5 free email marketing tools
  • Email marketing se affiliate kese kare

WHAT IS EMAIL MARKETING– email marketing kya hai (marketkng का मतलब होता है की आप अपने product या service की जानकारी email के through लोगो को बताएं|

Markerting क्या है – Marketing एक ऐसा तरीका है जिसके द्वारा आप अपने product और अपनी service को लोगों तक पहुंचा सकते हैं और उन्हें उनके बारे में सारी जानकारियाँ भी दे सकते हैं। इतना ही नहीं, मार्केटिंग के द्वारा आप लोगों के बीच में अपनी एक अलग पहचान बनाने में भी सफल हो सकते हैं।

जब बात marketing की जाती है तो बहुत सारे तरीके हैं उसमे से एक तरीका email marketing हैं लेकिन यह बहुत जरूरी है कि आप email marketing सही तरीका चुने और सिर्फ उसी तरीके को अपनाये जो आपके बजट और आपके प्रोडक्ट को सूट करता हो।
तो चलिए हम आपको बताते हैं marketing करने का सही तरीका जिसके द्वारा आप लोगों और customers के बीच में अपनी एक पहचान बना पाएंगे।
How to get started- email marketing करने के लिए आपको email की जरूरत पड़ेगी अब आप email को कलेक्ट करने के लिए अपना ब्लॉग या website start कर सकते है अब बहुत से लोग सोचेंगे कि हम paid method से email buy कर लेंगे but आप paid method use करोगे तो आपके पास target audience नही होगी
Example से समझते है कि आपने एक health releated blog start किया ओर आपके page पर visitor आएंगे तो बो health की information लेने आएंगे और अगर उन लोगो को आपका ब्लॉग पसंद आएगा तो बो आपका blog subscribe करेंगे जिससे आपके पास एक target audeince बन जाएगी अब आप अपना product या service start कर सकते है

email collect करने के लिए आप अपना blog या website स्टार्ट कर सकते है अगर आप ये चाहते कि कोई website build कर दे तो आप हमसे हमारे contact us पेज पर जाकर contact कर सकते है एक बार जब website start हो जाए तो आप email subscription box लगाकर आपने जो blog या website build kia hai usse email collect kar sakte hai |

HOW TO CREATE TARGETED AUDIENCE WITH EMAIL MARKETING -EMAIL MARKETIING SE TARGETED AUDIENCE KESE BNAYE –
हम एक example se समझते है maan लीजिये आप एक ब्लॉगर है ओर आप कई सारे post अपने blog पर share करते है अब आपको सब लोगो को बताना है कि मैने अपने blog पर एक unique and intresting post share की है इसके लिए आप घर जाकर तो नही बोल सकते कि मैने post share ki hai इसके लिए आपको email subscription button lgana होगा जिससे जो भी visitor apke blog ya website par aata hai to bo apka post pad sake usse uss post ke baare में notification pad

तो आप लोगो को ये सीखना है कि आप अपनी target audience kese bnaye deko yaar target audience बनाने के लिए आपको अपनी audience ke liye kuch unique करना होगा या तो आप ऐसा content provide kare जो apke visitor ke kaam aaye जिससे उनका benifit ho ओर अगर उनका benifit होगा तो wo आपके blog or website ko bhi subscribe karenge

Automated email marketing Why email marketing and its benifit
हमे यह समझना है की आज social media or bhut सारे digital program aa gye है तो क्या अभी भी email marketing तो मेरी तरफ से इसका answer हाँ kyun ki आप social media par leads nhi mil paati बहुत से unresponsive click आते है कोई visitor apka email box subscribe करता है तो इसका मतलब यह है की वो visitor intrested है तो आपको un visitor ko daily email send करना है जिससे वह आपके contact में रहे आगे जाकर आप अगर कोई अपना product Launch karte है तो आप visitor को email के जरिये अपने product ke baare mein bta skte ho और अपनी sales genrate karwa सकते हो।


Top 5 free email marketing tools

choosing a email service
email service start karne ke liye सबसे पहले आपके पास एक email address hona चाहिये लेकिन हम gmail service mein एक बार में सिर्फ एक मेल send kar skte hai isliye mene आपको email service ke baare me btaya
email service ऐसी company है जो free or paid version में अपनी services provide karte है

Top 5 free email marketing tools

  • mailerlite
  • omnisend
  • sendine blue
  • mailchimp
  • aweber


इसके अलावा भी बहुत है but mein personally इनकी services use kar चुका हूँ that’s why में aap logo ko recommended कर रहा हु आप इनकी services का benifit इनकी website पर visit karke ले सकते है
all service में आप एक बार में 300 से 500 लोगो को मेल कर सकते हो


अगर आपका budget acha है तो आप paid services की तरफ भी जा सकते हो paid service mein. apko getresponse के लिए prefer karunga इस service में आप unlimited लोगो को mail kar सकते हो और get response only 15 dollar se start हो जाती है जो india मैं लगभग 1000_1100 है और अगर आप नीचे दी गई link se service लेते है तो आपको additional discount milega


automated email marketing=

automated email marketing जैसा की आपको heading से समझ आ गया होगा कि हम automatic email marketing ki baat कर रहे है इसके लिए आप getresponse ka use कर सकते है यह बहुत अच्छा tool है automatic email marketing के लिए ईस tool मैं आपको सिर्फ एक बार setting karna है उसके बाद जब भी कोई आपकी blog या website को subscribe या कुछ item purchase करेगा तो ये tool उस visitor को इनफार्मेशन भेज देगा |

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what is gst  in hindi ?


email marketing se affiliate marketing kese kare


email marketing के लिए सबसे पहले आपको email की जरूरत पड़ेगी email collect करने के लिए आप अपना blog या website स्टार्ट कर सकते है अगर आप ये चाहते कि कोई website build कर दे तो आप हमसे हमारे contact us पेज पर जाकर contact कर सकते है एक बार जब website start हो जाए तो आप email subscription box लगाकर आपने जो blog या website बनाई है तो जिस topic पर aapne website बनाई है उस topic se related apne affilate product search करे |


एक बार product decide करके अपने subscriber को उस product के बारे में review दे
ओर subscriber उस product में intrested होगा तो वो आपके link पर click करके product buy करेगा और आपकी affilate commission generate होगा लेकिन एक बात याद रहे कि अगर आप long term तक इस field में रहना चाहते हैं तो अपने subscriber को गलत information नही dena |


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WHAT IS GST TAX (GOODS AND SERVICE TAX)-GST TAX क्या होता हैं?

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what is GST TAX

WHAT IS GST TAX (GOODS AND SERVICE TAX)-GST TAX -GST TAX GOODS AND SERVICE TAX या वस्तु एवं सेवा कर। यह टैक्स 1 जुलाई 2017 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा लागू किया गया था। यह TAX एक बहुत ही महत्वपूर्ण अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था हैं जिसे सरकार व कई अर्थशास्त्रियों द्वारा इसे स्वतंत्रता के पश्चात सबसे बड़ा आर्थिक सुधार बताया हैं।GST TAX के लागू होने से पहले अलग अलग राज्य सरकारों द्वारा अलग अलग दरों पर टैक्स लगाए जाते थे, तो उन सभी TAX को हटाकर उनकी जगह अब पूरे देश में अब एक ही अप्रत्यक्ष कर प्रणाली लागू कर दी गई हैं, जिससे भारत को एकीकृत साझा बाजार बनाने में मदद मिली।

  • GST:- GOODS AND SERVICE TAX.
  • Full form of gst – goods and service tax.
  • gst का पूरा नाम हिंदी मे:- वस्तु एवं सेवा कर।
  • यह कब लागू हुआ :- 1 जुलाई 2017 में लागू किया था ।
  • यह किसने लागू किया था :- इस टैक्स को भारत के राष्ट्रपति ने लागू किया था।

Gst संविधान में 122 वा संसोधन हैं।

Meaning of Gst in hindi:-

GST TAX GOODS AND SERVICE TAX या वस्तु एवं सेवा कर। यह टैक्स 1 जुलाई 2017 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा लागू किया गया था। यह टैक्स एक बहुत ही महत्वपूर्ण अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था हैं जिसे सरकार व कई अर्थशास्त्रियों द्वारा इसे स्वतंत्रता के पश्चात सबसे बड़ा आर्थिक सुधार बताया हैं।

GST TAX लागू होने से पहले कई प्रकार के tax देने पड़ते थे जैसे:- एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स ,वैट , मनोरंजन कर, लग्जरी कर आदि।
ऐसे टैक्सेज की वजह से पहले 30% से लेकर 35% तक टैक्स देना पड़ता था और कुछ चीजो पर तो प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से लगाए जाने वाला टैक्स 50% से ज्यादा होता था। gst आने के बाद यह टैक्स अधिकतम 28% हो गया हैं। gst आने से पूर्व , लोग 17 अलग-अलग तरह के टैक्स चूकते थे । जबकि gst लागू होने के बाद केवल एक ही तरह का टैक्स दिया जाता हैं। GST TAX के लागू होते ही एक्साइज ड्यूटी, वैट , मनोरंजन कर, लग्जरी कर जैसे बहुत सारे कर खत्म हो गए हैं।

GST TAX लागू होने के बाद किसी भी सामान और सर्विस पर टैक्स वहां लगेगा जहाँ वह बिकेगा। gst परिषद ने 66 तरह के प्रोडक्ट पर टैक्स की दरे घटा दी हैं |

WHAT IS GST TAX (GOODS AND SERVICE TAX)-GST TAX क्या होता हैं|

GST किस प्रकार का टैक्स हैं:- GST TAX इनडाइरेक्ट (indirect tax )टैक्स होता हैं

टैक्स दो प्रकार के होते हैं। एक डायरेक्ट टैक्स और दूसरा इनडायरेक्ट टैक्स।

डाइरेक्ट टैक्स वो टैक्स होता हैं। जो सीधा आपकी सैलरी में से कटता हैं ।

इनडायरेक्ट टैक्स वह TAXहोता हैं जो आप दूसरों के द्वारा देते हो जैसे:- माना कि आपने कपड़े खरीदे तो कपड़े पर जितना टैक्स लगेगा आपको कपड़े की कीमत में जोड़कर बता दिया जाएगा और आप उतना ही पैसा दुकानदार को दे देंगे । तो यह होता है इनडायरेक्ट टैक्स ।

भारत में डायरेक्ट टैक्स चुकाने वालो की संख्या मात्र 4% हैं क्योंकि नोकरी कम लोग करते हैं। लेकिन इनडायरेक्ट टैक्स सब लोग चुकाते हैं क्योंकि सामान सभी लोग खरीदते हैं और दुकानों और रेस्टोरेंट में सर्विस सभी लोग लेते हैं। तो आप कमाए या ना कमाए , ये टैक्स तो आपको भरना पड़ता हैं। चाहे आप अमीर हो या गरीब कोई अंतर नही नही किया जाता। सबको एक बराबर टैक्स भरना पड़ता हैं।

कितने तरह की gst की रेट लिस्ट हैं:- gst में 5 तरह की रेट्स होती हैं।
【1】0%
【2】5%
【3】12%
【4】18%
【5】28%

0% gst rate items~


खाने का सामान जैसे:- गेहू,चावल,आटा, मैदा,बेसन,चूड़ा, मुरमुरे,खोआ, ब्रेड,गुड़, दूध,लस्सी,पनीर,अंडे,मासाहारी सब्जी,शहद ,फल,सब्जियां,नमक,प्रसाद । कुमकुम , बिंदी,सिंदूर,चुडिया,पान के पत्ते,गर्भनिरोधक , स्टाम्प पेपर, कोर्ट के कागज़ ,डाक विभाग के पोस्टकार्ड ,लिफाफे, किताबे, स्लेट, पेंसिल, चॉक, समाचारपत्र ,मैप,बिना ब्रांड के आर्गेनिक खाद ,ब्लड, सुनने की मशीन।

5% Gst rate list item:-

ब्रांडेड :-अनाज,आटा, शहद । चीनी,चाय,कॉफ़ी ,मिठाई,खाद,तेल,मिल्क पाउडर, बच्चो के मिल्क फ़ूड, पिज़्ज़ा ब्रेड,टोस्ट ,पेस्ट्री,राशन का केरोसीन ,रसोई गैस, झाड़ू, क्रीम, मसाले ,जूस, साबूदाना,लौंग, दालचीनी, जायफल ,दवाइयां, कोक,कोयला,टायर,ईट,सोलर वाटर हीटर,लीफलेट,हेपेटाइटिस डायग्नोसिस किट, ड्रग फार्मूलेशन, कृच्, ब्लड वैक्सीन । [18:59, 03/10/2020] admin: 12% Gst rate list items~
वेजिटेबल जूस,नमकीन,मोबाइल,ड्राई फ्रूट, फ्रूट, बटर आयल, भुजिया, सोया मिल्क, अगरबत्ती, मोमबत्ती, बैंडेज, प्लास्टर, टूथ पाउडर, सिलाई मशीन ,सुई , बायो गैस, कॉलोर बुक, पेपर बॉक्स, क्राफ्ट पेपर, एक्सरसाइज, किचन के सेरेमिक आइटम्स, प्रिंटेड कार्ड, चश्मे का लेंस, शार्पनर , छुरी, स्टील , ताम्बे, एल्युमीनियम के बर्तन, इलेक्ट्रानिक वाहन, साईकल, खेल के सामान, खिलोने वाली साईकल , कार , स्कूटर , मार्बल, ग्रेनाइट ब्लॉक, छाता, वाकिंग स्टिक, कंघी, क्रेयॉन ओर्थपेडीक उपकरण।

18% Gst item rate items~
हेयर आयल, साबुन, टूथपेस्ट, केक, पेस्ट्री, जैम, आइसक्रीम ,मिनरल वाटर, कॉटन पिलो, टॉयलेट पेपर, कैमरा , स्पीकर, नोटबुक, निकोटिन गम , सॉफ्ट ड्रिंक कंसन्ट्रेट , डायबेटिक फ़ूड, रजिस्टर, एकाउंट बुक, इरेज़र, फाउंटेन पेन, नैपकिन, हेलमेट, प्लास्टिक प्रोडक्ट, शीट , कीटनाशक, बॉयोडीजल , घरेलू सामान, कांच की बोतल, विकलांगो की कार, इलेक्ट्रॉनिक मोटर, स्टील के एंगल , ट्यूब, पाइप, नट बोल्ट ।

28% Gst rates items~

इंसुलेटेड वायर केबल, एलुमिनियम के ड़ोर, विंडो और फ्रेम, लाइट फिटिंग, लैंप, कार, बस और ट्रक के ट्यूब टायर, प्लास्टिक की फ्लोर कवरिंग और बाथरूम फिटिंग्स , टाइल्स , स्टील पाइप, सनमाईका, प्लास्टर, प्लाई बोर्ड, पुट्टी, पेंट वार्निश, सीमेंट, वीडियो गेम कंसोल, लेदर प्रोडक्ट, फ़ोटो कॉपी और फैक्स मशीन, घड़िया, विग, इलेक्ट्रानिक हीटर , डिश वॉशर, वैक्यूम क्लीनर, टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, , लिक्विड सोप, डिटर्जेंट, सनस्क्रीन लोशन , मेनिक्योर प्रोडक्ट , पेडीक्योर प्रोडक्ट, पाउडर, हेयर ड्राई , क्रीम, कस्टर्ड पाउडर, इंस्टेंट कॉफ़ी, चॉकलेट, परफ्यूम, शैम्पू, ब्यूटी या मेकअप का सामान।

GST में कितने प्रकार के टैक्स होते हैं?

GST में 3 तरह के टैक्स होते हैं ।


  • 【1】CGST 【Central goods and service tax】सेंट्रल गुड एंड सर्विस टैक्स
  • 【2】SGST【State goods and service tax】स्टेट गुड्स एंड सर्विस टैक्स
  • 【3】IGST【Integrated goods and service tax】इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विस टैक्स

Gst काम कैसे करेगा?

एक राज्य में सामान बनता हैं, फिर उसी राज्य के होलसेलर के पास बिकता हैं, और फिर उसी राज्य में रिटेलर के पास बिकता हैं और फिर उसी राज्य की जनता के बीच मे वही सामम बिकता हैं तो यह सारा काम एक ही राज्य में होता हैं । तो उस पर CGST और SGST लगेगा। केंद्र और राज्य के पास जाएगा यह टैक्स ।

अगर एक राज्य से दूसरे राज्य में कोई सामान बिकता हैं तो उसपे IGST लगता हैं जैसे :- मुम्बई में कोई सामान बना और वह सामान दिल्ली में बिकेगा तो उसपे IGST लगेगा।
[18:59, 03/10/2020] admin: GST के फर्जी बिल की पहचान कैसे करे?

सबसे पहले तो जिसको कारोबारी को फाइनल GSTIN नंबर नही मिला , उनको प्रोविशनल gst नंबर इस्तेमाल करना चाहिए।

गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू होने के बाद ट्रांसक्शन के बिल के मामले में शॉपिंग करने वाले लोगो के लिए प्रावधान का ये दौर बहुत मुश्किल हो रहा हेंन क्योंकि इसकी वजह यह हैं कि कई बार ग्राहकों को फर्जी बिल दे दिया जाता हैं।

अब हम आपको बताएंगे कि सही बिल की पहचान आप कैसे करोगे ।

सभी दुकानदारों के लिए gst रजिस्ट्रेशन जरूरी नही हैं । जिनको gst रजिस्ट्रेशन जरूरी नही हैं वह आपसे gst चार्ज नही कर सकता । जिस बिल में GSTIN नंबर होता हैं उसमे CGST और SGST का अलग अलग उल्लेख होना जरूरी हैं।

कई दुकानदार पुरानी रसीद से ही gst वसूल रहे हैं जिसमे वैट या टिन नंबर लिखा हैं । यह गलत हैं।

जिन कारोबारियो को या दुकानदारों को फाइनल GSTIN नंबर नही मिला हैं , उन्हें प्रोविशनल gst नंबर इस्तेमाल करना चाहिए। और साथ ही समय समय पर gst रिटर्न फाइल करना जरूरी हैं। और प्रोवीजनल gst नंबर ही GSTIN में बदल जाता हैं।

हर किसी ग्राहक को पता होना चाहिए कि दुकानदार आपको सही बिल दे रहा हैं या नही ।

अगर दुकानदार 15 अंको के gst नंबर के साथ कंप्यूटर से बना बिल नही दे तो दिया हुआ बिल फ़र्ज़ी हो सकता हैं। उपभोत्ता चाहे तो इसकी शिकायत वाणिज्य विभाग में कर सकता हैं।

GSTIN/UIN का स्ट्रक्चर :-

GST नंबर में पहले 2 अंक स्टेट कोड होते हैं। हर राज्य का स्टेट कोड अलग -अलग होता हैं।

उसके बाद 10 अंक कारोबार मालिक या दुकानदार का पैन नंबर होता हैं।

13वां अंक के कारोबार में रजिस्ट्रेशन की संख्या के हिसाब से जारी करते हैं।

14वां अंक डिफ़ॉल्ट तरीके से z रखा गया हैं।

आखिरी अंक चेक कोड के लिए दिया जाता हैं। यह कोई अंक या अक्षर हो सकता हैं।

आशा करता हूँ । आपको gst का टॉपिक पूरा समझ आ गया होगा। पूरा पढ़ने के लिए धन्यवाद।

WHAT IS DEMAT ACCOUNT IN HINDI – डीमेट एकाउंट क्या होता हैं

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what is demat account full information in hindi

WHAT IS DEMAT ACCOUNT IN HINDI – आज हम आपको demat acoount के बारे मे बता ने जा रहे हैं । demat account क्यों होना  चाहिए demat account kese kaam karta hai

यह कैसे काम करता हैं -how does it work

demat account के लाभ और हानि -advantages and disadvantage of demat account

डीमेट खाते के कारण -due to demat account

demat account कौन-कौन खुलवा सकता हैं- who can open a demat account

डीमेट का पूरा नाम (full form of demat):- Demat का पूरा नाम होता हैं, Dematerialized.

WHAT IS DEMAT ACCOUNT IN HINDI –

  • शेयर बाज़ार में डीमेट खाते का मतलब होता हैं, ऐसा खाता जिसमे छुई ना जाने वाली वस्तुओं को रखा जाए।
  • यह वस्तु शेयर्स , म्यूच्यूअल फण्ड या कोई प्रतिभूति हो सकती हैं।

ज्यादातर लोग demat account का उपयोग शेयर खरीदने व बेचने के लिए करते है । demat खाता भी बैंक खाते की तरह काम करता है। यहां भी बैंक बैलेंस की केवल पासबुक में प्रविष्टि कराई जा सकती है, आप इसको भौतिक रूप में अपने पास  नही रख सकते ,

इसमे बैंक खाते की तरह ही debit और credit हैं और इसकी सुरक्षा भी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से होती है।demat account एक ऐसा खाता हैं जहाँ हम अपने शेयर को रख सकते है और डीमेट एकाउंट के जरिये  ही हम शेयर खरीदते और बेच सकते है। अगर हमे शेयर बाजार में निवेश करना है तो सबसे पहले हमें डिमैट एकाउंट की जरूरत होती हैं ,बिना डीमेट एकाउंट के हम शेयर न तो खरीद सकते है और ना ही बेच सकते है। तो  शेयर बाज़ार म निवेश के लिए सबसे पहले डिमैट एकाउंट होना बहुत जरूरी है। इसके अलावा अगर आपको अपने शेयरों को इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) में लागू करना है तो भी आपके पास डीमेट एकाउंट होना चाहिए ।

demat account कुछ ऐसा होता है , जिस तरह आपके बैंक के खाते में आपका पैसा बैलेंस के तौर पर होता हैं।

इस बैलेंस को आप सीधा छू नही सकते क्युकी वह सिर्फ एक  इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में होता है ।

लेकिन जब आप बैंक से पैसा नकद निकलते है , तो उसे छू सकते है।

demat account क्यों होना चाहिए?

SEBI के निर्देश के अनुसार डीमेट को छोड़के किसी अन्य रूप में हम शेयर खरीद या बेच नही सकते । इसलिए , अगर आपको शेयर बाजार में निवेश करना हैं या share खरीदना या बेचना हैं तो आपके पासdemat account होना अनिवार्य हैं।

भारत में दो तरह की डिपोस्टरी हैं :- पहली नेशनल सिक्योरिटी डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) और दूसरी सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) , जिनके द्वारा कई प्रकार के डिपॉजिटरी प्रतिभागियो द्वारा शेयर आयोजित किये जाते है । डिपॉजिटरी में शेयर , बॉन्ड, डिबेंचर्स, सरकारी प्रतिभूतियां , म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट आदि जैसी सुरक्षा प्रदान की जाती हैं।

डिपॉजिटरी प्रतिभागी :- डिपॉजिटरी प्रतिभागी निवेशकों और डिपोज़िटरीज़ के बीच मे मध्यस्थ होता हैं ।

डिपॉजिटरी से किसी भी सेवा का लाभ उठाने के लिए, निवेशकों को डिपॉजिटरी प्रतिभागी की आवश्यकता होती हैं।

मूल सेवाएं :- डीमेट खाता व्यक्तिगत  रूप से या पहले से ही उपलब्ध डीमेट एकाउंट में स्थानांतरित किया जा सकता है। अगर आपके डीमेट एकाउंट की होल्डिंग जैसे स्टॉक, बॉन्ड, म्यूच्यूअल फण्ड ,सिक्योरिटीज 2 लाख से कम है तो आप इसे अपने उपलब्ध खाते में रूपांतरित कर सकते है । और अगर उपभोक्ता की होल्डिंग 0 रुपए से 50,000 रुपए तक हो तो उनको रूपांतरण की सुविधा नही मिलती । अगर आपकी होल्डिंग 50,001 रुपए से लेकर 2 लाख के बीच में है तो रूपांतरण करने में 100 रुपए का भुगतान करना पड़ेगा।

प्रभार शामिल :- प्रभार और फीस  अलग -अलग  संस्थान के  अनुसार होती है और यह खाता कैसा है और कितनी राशि का हस्तांतरण करना होता है इस पर भी निर्भर करता है जैसे:- वार्षिक रखरखाव शुल्क , लेन- देन , ब्रोकरेज शुल्क , या खाता खोलने का शुल्क कुछ प्रभार है जो कि डीमेट खाते में शामिल है।

अभोतिकिकरण :- आपके भौतिक शेयरों को इलेक्ट्रॉनिक रूप में परिवर्तित  करने को ही अभोतिकिकरण कहते है।

DEMAT ACCOUNT कैसे काम करता है?

जब आप शेयर खरीदते है , तब ब्रोकर डीमेट एकाउंट के साथ उसमे शेयर को क्रेडिट कर देता है और यह आपके होल्डिंग के विवरण में दिखने लगता है। और अगर आप अपना व्यापार इंटरनेट आधारित प्लेटफॉर्म से करते है  तो आप अपनी होल्डिंग्स को ऑनलाइन देख सकते है । ब्रोकर शेयरों को T +2  पर क्रेडिट कर देता है , जो कि ट्रेडिंग डे + 2 दिन बाद होता है।

जब आप शेयर बेचते है ,आपको अपने ब्रोकर को डिलेवरीके निर्देश देते होते हैं, जिसमे आपको बेचे हुए स्टॉक में  विवरण  भरना पड़ता हैं । आपके खाते में शेयर डेबिट हो जाता  हैं और आप बेचे हुए शेयर के लिए भुगतान करते हैं। और अगर आप इंटरनेट द्वारा भुगतान करते हैं तो आपके खाते में राशि का क्रेडिट और शेयर का डेबिट दिखने लगता हैं।

  • Benifit of demat account डीमेट खाते के लाभ :-
  • कभी भी कोई व्यक्ति आपके शेयरो को चुरा नही सकता ।
  •  शेयर ट्रांसफर करने की प्रक्रिया बहुत सरल हो गई हैं। 
  •  आपके पास कितने भी शेयर्स हो आप उन्हें आसानी से आने पास रख सकते हैं।
  • एक शेयर भी ट्रांसफर कर सकते है।
  •  शेयर्स को ट्रांसफर करने पर खर्च भी कम होता हैं।
  • बोनस जैसी प्रक्रिया में शेयर अपने आप एडजस्ट हो जाता हैं।
  •  और तो और शेयर्स के गुम हो जाने की समस्या नही रहती ।
  • डीमेट खाते के नुकसान :-   किसी भी चीज के फायदे और नुकसान दोनो होते है , इसी प्रकार डीमेट खाते के  भी कुछ नुकसान है।
  •          आपके ब्रोकर आपके खाते का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं, इसलिए  उन पर नज़र रखनी पड़ती हैं।
  • जब तक डीमेट खाते में कोई भी शेयर हैं तब तक उस खाते को बंद नही किया जा सकता  और तब तक निवेशक को इस से जुड़े सारे चार्ज देने पड़ते हैं।

DEMAT खाते के कारण:-

भारत मे 1996 के डिपॉजिटरी एक्ट  के बाद से ही डीमेट खाते की शुरुवात हुई थी ।

इससे पहले जो भी शेयर होते थे वो एक प्रमाण पत्र में आते थे ।

हर एक शेयर के लिए एक सर्टिफिकेट होता था।

अगर आपके पास 100 शेयर हो , तो आपके पास 100 शेयर सर्टिफिकेट होते ।

अगर आपके पास अलग अलग कंपनियो के शेयर्स होते  तो आपके पास कई सारे सर्टिफिकेट हो जाते और उनको सम्भालना बहुत मुश्किल होता था।

और गुम होने का ,चोरी होने का , तथा फटने के डर रहता था।

और जब आपको अपने शेयर बेचने होते थे तो इसे खरीददार के नाम पर ट्रांसफर करने में भी बहुत समय लगता था।

और अब इन्ही सब समस्या का समाधान हैं डीमेट एकाउंट ।

DEMAT ACCOUNT कोन – कोन खुलवा सकता हैं?

18 वर्ष के ऊपर का वयस्क व्यक्ति डीमेट एकाउंट खुलवा सकता हैं , यह तक कि एक स्टूडेंट भी यह खाता खुलवा सकता हैं अगर उसके उसके पास जरूरी कागजात हो ।

तो यह था डीमेट एकाउंट , उम्मीद करता हु आपको इसके बारे में सब समझ आ गया होगा।

 हमारी पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका शुक्रिया।