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HOW TO GET A BEST BPO JOB ? IN HINDI:2021

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HOW TO GET BPO JOB IN HINDI
BPO JOB IN HINDI FULL FORM OF BPO JOB BPO JOB IN DELHI BPO JOB IN MUMBAI TCS BPO JOB

HOW TO GET A BPO JOB? BPO में नोकरी कैसे पाएं?

HOW TO GET A BPO JOB in hindi सबसे पहले आप अपना एक resume तयार रखे। उस resume में आपकी personal detail होनी चाहिए जैसे आपका नाम , माता पिता का नाम ,आपकी gmail id , contact detaill ,hobbies, आदि।

अब आप अपने self introduction के लिए खुद को prepare कर ले। self introduction में आपको थोड़ा english का इस्तेमाल करना पड़ता है क्योंकि ज्यादातर interview लेने वाले सब english में ही पूछते है । इसमें आपको company की basic knowledge होनी चाहिए, आपकी strength ,weakness पता होनी चाहिए ,hobbies मालूम होना चाहिए।

interview के लिए जाते समय आप अपने साथ जरूरी documents जरूर ले जाये जैसे :- अपनी marksheets , अपनी ID proof , etc.. और जो भी अप्पने detail दी है वो bilkul shi accurate होनी चाहिए क्योंकि company आपके background detail भी देखती है। और आपको interview देते समय अपना behaviour बहुत ही soft रखना होगा ।communication skill आपकी बहुत अच्छी होनी चाहिए, बात करते समय आपके face पे एक छोटी सी smile होनी चाहिए।

और आपकी dressing formal होनी चाहिए । semi formal हो तो भी अच्छा है लेकिन formal होना जरूरी है।

BPL card कैसे बनवाये?

How to start (BPO)? BPO कैसे शुरू करे?

अगर आप BPO खोलना चाहते है तो हम इसके बारे में भी आपको जानकारी देंगे।

BPO खोलने के लिए आपको हमारी कुछ steps follow करने होंगे जिससे आप BPO खोल सकते है।

choose BPO category

सबसे पहले आपको इसकी category चुनना पड़ेगी की कोनसा BPO JOB आप start करना चाहते है। वैसे तो BPO JOB  की 4 category होती है लेकिन हम 2 जो सबसे ज्यादा important होते है उनके बारे में बताएंगे। एक तो Inbond BPO और दूसरा Outbond BPO.

INBOUND BPO JOB:-

inbound bpo JOB  वो होता है जिसमे customer direct company से contact करती है। company के product के लिए customer company को call chat,internet call ,email के द्वारा conatct करती है।

OUTBOND BPO JOB:-

इसमे customer company को call नही करता बल्कि इसमें company customer से contact करती है।

BPO JOB LOCATION:-

वैसे तो इस बिज़नेस को कहि से भी शुरू कर सकते है ,लेकिन इस business में internet और light का इस्तेमाल ज्यादा होता है तो वही जगह चुने जहाँ पर आपको light की सुविधा ठीक से प्राप्त हो ।

LICENCE AND REGISTRATION IN BPO JOB :

अगर आपको इसमे registration करवाना है तो आपको private limited company होना जरूरी है। company के नाम से उसका pan card होना भी जरूरी है और current account भी खुलवाना पड़ेगा।

Invest in BPO JOB :

इस business में आपको पहले से plan करना होगा की आपका खर्चा कितना होगा । आपका खर्चा office rent, computers, employees salary, office renovation, telephone lines, high speed internet connection आदि में होगा।

Appointment of Staff:

BPO के काम के लिए आपको educated person hire करने होंगे जिनकी communication skills अच्छी होनी चाहिए , english अच्छी होनी चाहिए आदि और staff को hire करने के बाद आपको उनको training देना जरूरी है।

PROMOTION IN BPO JOB :-

promotion हर business के लिए बहुत जरूरी होता है क्योंकि बिना promotion के हम अपने business को successful नही बना सकते। busines के promotion कर बहुत तरीके होते है जैसे:– networking , social media, magazine, newspaper , referral partners etc….

तो ऐसे आप अपना BPO business start कर सकते है।

APPLY IN BPO JOBS : CLICK  MECLICK ME CLICK ME

 WHAT IS (BPL)? BPL KYA HAI? FULL FORM OF BPL?

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WHAT IS BPL BPL KYA HAI
BPL KYA HAI BPL KE BENIFIR FULL FORM OF BPL

 WHAT IS (BPL)? BPL KYA HAI?

What is BPL BPL KYA HAI  BENIFIT OF BPL  Kese apply kare भारत के संविधान में सब नागरिकों को एक समान अधिकार दिया गया है। चाहे वो किसी भी जाति का हो , किसी भी धर्म का हो या किसी भी जाति का हो , सबको एक नजरिये से देखा जाता है। BPL में वह लोग आते है जो गरीबी रेखा से नीचे होते है । इसमे सरकार लोगो की मदद करती है जो गरीबी रेखा से नीचे होते है, जिनपे खाने को पर्याप्त भोजन नही होता , रहने के लिए घर नही होता , शिक्षा के लिए पैसे नही होते आदि। BPL में वह लोग आते है जो आर्थिक रूप से बहुत कमजोर होते है । जो लोग आर्थिक रूप से ज्यादा कमजोर होते है|

उन लोगो को अपना जीवन काफी मुश्किलों से गुजरना पड़ता है। इन्ही लोगो की सहायता करने के लिए हमारी भारत सरकार ने इन लोगो को bpl की श्रेणी में रखा है जिसके तहत सरकार उनको कई तरह की सुविधा प्रदान करती है।

उन सुविधायों से वह लोग अपना और अपने परिवार का आसानी से पालन पोषण कर सकते है। भारत सरकार द्वारा इनको कुछ चीजे प्रदान की जाती है जैसे खाना, जमीन , ग्राहक सेवा, शिक्षा आदि। लेकिन BPL की सुविधा लेने के लिए BPL CARD बनवाना जरूरी होता है । BPL CARD के बिना आपको इसकी सुविधा प्रदान नही होगी।

FULL FORM OF BPL:- BELOW POVERTY LINE

BPL card कैसे बनवाये? How to make bpl card?

BPL CARD बनवाने के लिए आपको अपने क्षेत्र के ग्राम पंचायत , नगरपालिका , जनपद केंद्र या कार्यपालिका आदि जगह से बीपीएल कार्ड से सम्बंधित फॉर्म ले सकते है , यह फॉर्म Market में भी मिल सकता है और online भी इए download कर सकते है ।

इस form में आपको अपनी सभी जानकारी भरनी होती है जैसे सालाना आपकी income कितनी है , परिवार में कितने सदस्य है व उनकी आयु कितनी है , अपना स्थायी पता आदि ।

आपके द्वारा दी जाने वाले जानकारी से ही सुनिक्षित होता है कि आप BPL CARD के लिए उपयुक्त है या नही। आपके द्वारा दी जाने वाली पूरी जानकारी सही होनी चाहिए ।

आपकी पूरी जानकारी सही होगी तब कर्मचारी आपके आवेदन फॉर्म को स्वीकार करते है । वह फॉर्म कुछ दिनों या ज्यादा से ज्यादा 2 महीने के अंदर आप अपने बीपीएल कार्ड को कार्यलय से प्राप्त कर सकते है । आप अगर इस वर्ग में आते है तब ही आवेदन कर अन्यथा आप पर कानूनी कारवाही की जा सकती है।

BPL CARD बनवाने के लिए दस्तावेज ? Documents for making BPL CARD?

BPL KYA HAI ? BPL card को बनवाने के लिए कुछ जरूरी document जमा करवाने पड़ते है जैसे :-

(1)Income certificate(आय प्रमाण पत्र) :- आवेदन के समय आपको अपनी और अपने परिवार की सालाना आय का प्रमाण पत्र देना होता है क्योंकि आप की आय पर ही निर्भर होता है कि आप bpl की श्रेणी में आते है या नही ।

(2) पूरे परिवार के सदस्यों की जानकारी के लिए आपको सबके आधार कार्ड या पूरे परिवार का राशन कार्ड देना होता है। क्योंकि इनमें सब सदस्यों की उम्र और उनके नाम दर्शाया जाता है।

(3) नागरिकता का प्रमाण पत्र (permanent resident identity):-
BPL card की सुविधा प्राप्त करने के लिए आपको इस नागरिकता के प्रमाण पत्र को अपने क्षेत्र में दिखाना पड़ेगा। आपको अपने आवेदन के दौरान अपने क्षेत्र के लिए नागरिकता प्रमाण पत्र से जुड़े documents भी जमा करने पड़ेंगे ।

(4) फ़ोटो (photo):-
आवेदन पत्र पर लगाने के लिए आपको 2 फ़ोटो की जरूरत पड़ती है।

BPL card कैसे बनवाये ?

बीपीएल कार्ड बनवाने के लिए आप 2 तरीके से apply कर सकते है online और offline । online apply करने के लिए आपको अपने राज्य की खाद्य एवं रसद विभाग की official website पर जाना होता है। आपको online apply करने के लिए अपने नजदीकी जनसेवा केंद्र जाना पड़ेगा ।

offline में आपको अपने जिले के खाद्य एवं रसद विभाग में जाकर आपमे जरूरी documents के साथ जमा कर सकते हस। यदि आप bpl card के पात्र होंगे तो आपका bpl कार्ड बन जाएगा।

 सालाना आये (one year income):- BPL CARD वही लोग बनवा सकते है या बीपीएल का लाभ वही लोग ले सकते है , जिनकी सालाना आय 20,000 हो या उससे कम हो । वही लोग इसका फायदा ले सकते है।

BPL LIST में अपना नाम कैसे देखे? How to see your name in BPL LIST?

जिसने भी BPL के लिए आवेदन दिया है , वह व्यक्ति BPL list में अपना नाम देखना चाहता है तो वह online और offline दोनो तरीको से अपना नाम देख सकता है । offine तो वो कार्यलय में जाकर देख सकता है और अगर online देखना चाहते है तो अपने राज्य की website में जाकर देख सकता है । हर राज्य की अपनी एक अलग website होती है तो आप सिर्फ अपने ही राज्य की website पर अपना नाम देखे। website खुलने के बाद आप अपने नाम और card number डाल दे । फिर सभी bpl धारकों के नाम सामने आ जाएंगे । उनमे से आप अपना नाम देख सकते है।BPL KYA HAI  लिस्ट यहाँ देखे

ये भी पड़े>MSME की मदद सेअपना कारोबार कैसे बढ़ाये?

BPL CARD के फायदे (Benifits of BPL card)?

जो लोग गरीबी रेखा से नीचे है , उनके लिए सरकार ने बीपीएल कार्ड की सुविधा प्रदान की है । इसके जरिये सरकार उन गरीब लोगों को सरलता से जीवन जीने में मदद करती है।

(1) चावल :- बीपीएल कार्ड वालो को सरकार 3 से 4 रुपए किलो में चावल बेचती है।

(2) अनाज :- अनाज भी बहुत ही सस्ते दाम मात्र 2rs किलो पर लोगो को मुहिया कराया जाता है।

(3)नमक और दाल:- BPL card वालो को नमक और दाल भी बहुत सस्ते दामो पर मुहिया कराई जाती है।

(4)केरोसिन तेल:- चूल्हा जलाने के लिए भी सरकार इन लोगो को तेल मुहिया कराती है।

(5) शिक्षा :- गरीबी रेखा के नीचे आने वाले लोगो को सरकार शिक्षा में भी बहुत लाभ देती है । सरकार ने शिक्षा के लिए सरकारी संस्था में फीस में भी बहुत राहत दी है।

(6) चिकित्सा:- अगर किसी भी BPL धारक को कोई भी बीमारी होती है तो वह सरकारी hospital में अपना इलाज कम पैसो में करवा सकता है।

(7) बैंक लोन:- जिनके पास BPL CARD हो वह व्यक्ति कोई भी सरकारी बैंक से अपने किसी भी निजी काम के लिए loan ले सकता है । और उसको loan सामान्य ब्याज दर से भी कम ब्याज दर पर loan दिया जाता है|

NOTE :

बीपीएल का लाभ वही लोग ले सकते है , जिनकी सालाना आय 20,000 हो या उससे कम हो । वही लोग इसका फायदा ले सकते है।

What is franchise? 2020 में best franchise कैसे ले ?

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franchise kya hota hai ? franchise kese lete hai? franchise kaise choone ?

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What is franchise? (फ्रैंचाइज़ी क्या होता है?)

आज के इस पोस्ट में हम आपको बताएंगे कि franchise kya hota hai ? franchise kese lete hai? franchise kaise choone ? आदिfranchise मतलब होता है किसी भी अन्य company के product को commision base पर बेचना ।

What is franchise? (फ्रैंचाइज़ी क्या होता है?)

franchise एक ऐसा काम है जिसमे आप किसी भी other famous company के product को अपनी shop(दुकान) या showroom से बेचने का काम करते है। आप अगर किसी फेमस 4 company के product को बेचते है तो बहुत ही आसानी से आप उसके product को बेच सकते है

Meaning of franchise in hindi:-

वैसे तो फ्रैंचाइज़ी का मतलब मताधिका होता है लेकिन business में इसका मतलब होता है किसी company के product and services को बेचने का legal अधिकार प्राप्त करना।
इसमे एक शब्द और इस्तेमाल होता है

How to bring a franchise?(फ्रैंचाइज़ी कैसे ले?)

अगर आप किसी company की franchise लेना चाहते है। तो सबसे पहले आपको company choose करनी होगी जिस भी company की आप franchise लेना चाहते है उस company का चयन करें , फिर उस company के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर ले , फिर जिस product की आप franchise लेना चाहते है

How to choose a franchise?(फ्रैंचाइज़ी कैसे चुने?)

franchise का चुनाव करने के लिए सबसे पहले तो आपको अपना budget set करना होगा की आपको किस budget में franchise लेनी है। कम से कम आप 2 लाख से लेकर 10 लाख तक छोटी company की फ्रैंचाइज़ी ले सकते है। फिर जिस product की आप franchise लेना चाहते है और जिस क्षेत्र में अपना business करना चाहते है।

franchise एक ऐसा काम है जिसमे आप किसी भी other famous company के product को अपनी shop(दुकान) या showroom से बेचने का काम करते है। आप अगर किसी फेमस 4 company के product को बेचते है तो बहुत ही आसानी से आप उसके product को बेच सकते है

क्योंकि पहले से कोई famous company का कोई product हो तो उस product की advertising करने की जरूरत नही होती क्योंकि पहले से ही वो product इतना famous होता है कि हर इंसान उस product से वाकिफ होता है और famous product को आप आसानी से बेच सकते है

औरacha मुनाफा earn कर सकते है। franchise लेने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि आपको product की ना तो कोई adverisement करनी पड़ती, ना ही उस product को बनाना पड़ता ।

जब आप franchise लेने जाओगे तो franchise owner आपको खुद ही सभी facility उपलब्ध करा देता है । बस आपको उसकी franchise लेनी है और उनके product को बेचना होता है। आप अपने budget के हिसाब से franchise ले सकते है।

जिस company की फ्रैंचाइज़ी आप लेना चाहते है तो आपको उस company के सारे नियम व शर्ते का पालन करना पड़ता है। franchise business में बहुत सारी company है जो अपनी franchise की सुविधा पूरे India में प्रदान करती है।

franchise business के आने के बाद बहुत सारे लोग जो बेरोजगार थे उनको रोजगार मिला है । आज कल franchise की demand दिन पे दिन भड़ती जा रही है क्योंकि कम लागत में आप अपना business चालू कर सकते है और ज्यादा महेनत करने की जरूरत भी नही होती। यह business उन लोगो के लिए अच्छा है जो अपना खुद का business करना चाहते है ।

franchise की एक और अच्छी बात है कि इसमें आपको ज्यादा educated होने की जरूरत नही होती , बस आपको थोड़ी business knowledge होनी चाहिए। franchise इस काम है जिसे आप किसी भी क्षेत्र यानी किसी भी गांव या शहर में शुरू कर सकते है । गांव में आप call center या computer training center जैसी franchise लेके business शुरू कर सकते है और शहर में आप education, food, health, vehicles आदि की franchise लेकर अपना business शुरू कर सकते है।

Meaning of franchise in hindi:-

वैसे तो फ्रैंचाइज़ी का मतलब मताधिका होता है लेकिन business में इसका मतलब होता है किसी company के product and services को बेचने का legal अधिकार प्राप्त करना।

इसमे एक शब्द और इस्तेमाल होता है वो है franchisor. अब आप सोच रहे होंगे कि franchisor किसे कहते है । तो हम आपको बताते है कि franchisor किसे कहते है। franchisor का वैसे तो कोई हिंदी मतलब नही है , लेकिम business में franchisor उसको कहा जाता है जो अपने product को बेचने की सुविधा प्रदान करता है उसे franchisor कहा जाता है।

READ THIS :WHAT IS MSME?

How to bring a franchise?(फ्रैंचाइज़ी कैसे ले?)

अगर आप किसी company की franchise लेना चाहते है। तो सबसे पहले आपको company choose करनी होगी जिस भी company की आप franchise लेना चाहते है उस company का चयन करें , फिर उस company के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर ले , फिर जिस product की आप franchise लेना चाहते है उस हिसाब से यह देख ले कि आपका business कहा चलेगा गांव में या शहर में , इन सब के बाद आपको अपना budget set करना है क्योंकि आप अपने budget के अनुसार ही brand choose कर पाएंगे। और आखिरी में आप उस brand या company की website पर जाकर online आवेदन कर सकते है।

How to choose a franchise?(फ्रैंचाइज़ी कैसे चुने?)

franchise का चुनाव करने के लिए सबसे पहले तो आपको अपना budget set करना होगा की आपको किस budget में franchise लेनी है। कम से कम आप 2 लाख से लेकर 10 लाख तक छोटी company की फ्रैंचाइज़ी ले सकते है। फिर जिस product की आप franchise लेना चाहते है और जिस क्षेत्र में अपना business करना चाहते है। उस क्षेत्र का मुआयना कर ले , की आपका business उस क्षेत्र में चलेगा भी या नही। फिर जिस company की franchise आप लेना चाहते है उसकी market value पता कर ले कि कितनी है और क्या आप उसको आगे बढ़ा पाएंगे। इन सब के बाद आप franchise लेने का निर्णय कर सकते है।

आपने अगर निर्णय कर लिया है की आओको franchise लेनी है तो आपको franchisor को अपना budget बताना होगा फिर आपसे वह कुछ जानकारियां लेंगे जैसे आप किस क्षेत्र में franchise खोलना चाहते है , वह की जन शंख्या कितनी है , आपका बजट कितना है आदि के हिसाब से franchisor अपना एक plan देगा , हर franchise के अपने कुछ नियम शर्ते होती है जिन्हें हमे मानना पड़ता है। franchise लेने से पहले आप company के नियम शर्ते सब जान ले उसी के बाद franchise ले।

Advantage of franchise(फ्रैंचाइज़ी लेने के फायदे)

अगर आप किसी बड़ी या famous company की franchise लेते है तो पहले से ही उस company कके product को सब लोग जानते ही है तो आपको उसकी marketing ,advertisment नही करना पड़ता , न ही उसे बेचने के लिए महेनत करनी पड़ती ,ग्राहक खुद ही आ जाता है product खरीदने । और अगर advertisment करना भी होता है तो वो भी company खुद ही करती है आपको कुछ कुछ नही करना होता आपको बस सामान बेचना होता है। और company के product की जो rate होती है वो कम ज्यादा नही होती तो आपको समान बेचने में और आसानी हो जाती है।

Disadvantages of franchise(फ्रैंचाइज़ी के नुकसान)

जाहिर सी बात है कि हर चीज के फायदे है तो नुकसान भी होते ही है। franchise लेने का नुकसान सबसे बड़ा यह होता है कि ये business आपका होते हुए भी आपका नही रहता क्योंकि इसमें आपके नियम शर्ते नही चलती , आपकी दुकान होते हुए भी आप इसको अपने हिसाब से नही चला सकते आपको जो भी करना होगा सब company के नियम के अनुसार ही करना होगा । और अगर आपको business में कोई भी बदलाव करना है तो आपको बार बार company से ही बात करना पड़ेगी।
और आप जिस company की franchise लेना चाहते है वह company security के तौर पर आपसे एक अच्छी खासी रकम ले लेते है और वह रकम तब तक company के पास रहते है जब तक आप उस company की franchise चलाते है। और franchise चलाते समय होने वाले नुकसान भी आपको ही झेलना पड़ता है और चाहे आपकी franchise को profit हो या loss ,आपको अपनी कुछ sale का हिस्सा company को देना ही पड़ेगा।

franchise लेने के लिए company की क्या शर्ते होती है?

जगह (place) :- franchise लेने के लिए आपके पास एक अच्छी और प्रयाप्त जगह होनी चाहिए।

*समय(time):- अलग अलग company के अलग अलग rules होते है जैसे कुछ company निश्चित समय के लिए franchise देती है तो कुछ company आजीवन यानी जीवन भर के लिए franchise देती है।

*योग्यता(education):- franchise लेने के लिए वैसे तो कोई education की खास जरूरत नही होती बस आपको business knowledge होना चाहिए । लेकिन कुछ company है जो education और technology से जुड़ी है उनमें graduate होना जरूरी होता है।

franchise लेने के लिए कौनसे document होने चाहिए?

*पहचान पत्र जैसे pancard, aadharcard, photo.

इसके अलावा भी कुछ documents होते है जिनकी आपको जरूरत पड़ती है और जो आपके पास नही होते, franchise लेने से पहले आपको वह documents बनवाने पड़ते है। जैसे आपको एक restaurant खोलना है तो उसके लिए आपको food licence बनवाना पड़ेगा। ऐसे ही आपको कुछ documents है जो franchise लेने से पहले बनवाने पड़ेंगे।

agreement(एग्रीमेंट):- franchise agreement में कुछ नियम और शर्ते होती है जो owner के द्वारा तय किये जाते है और जो franchise लेक्ट है उसे वह नियम मानने पड़ते है । कई बार agreements में कुछ बाते ऐसी लिखी होती है जिससे फ्रैंचाइज़ी लेने वाले को नुकसान हो सकता है तो agreement sign करने से पहले उसको अच्छी तरह पढ़ ले समझ ले तब sign करे। agreement इसलिए sign कराया जाता है ताकि future में franchisor और franchise लेने वाले व्यक्ति को कोई तकलीफ न हो।

किन किन क्षेत्र में franchise ले सकते है?

Food and braverage franchise
इसमे आप McDonald’s , amul, cocacola, pepsi, frooti, pizza hut आदि की franchise ले सकते है।

Education and training center franchise
इसमे आपको Aloha India, TMC shipping, Novatech Robo आदि की franchise ले सकते है।

Beauty and care franchise
इसमे आपको keva ayurveda, Relooking franchise ,jawed habib आदी की franchise मिल सकती है।

Retailer franchise

इसमे आपको Lakme, cotton king, toys bazar आदि की franchise ले सकते है।

इसमे दी गयी franchise के अलावा भी बहुत सारी franchise होती है जिन्हें आप अपने budget के अनुसार ले सकते है।

What is facebook campaign? facebook campaign kya hota hai full and best guide beginner to advance in 2020

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facebook campaign
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What is facebook campaign? facebook campaign क्या होता है?

Facebook campagin में प्रचार (advertise) करने के लिए use होने वाले तरीके (procedure) के एक भाग को facebook campaign कहते है। जैसे मान लीजिए आपकी company ने कोई product launch किया और उस product की जिम्मेदारी आपको दे दी , तो अगर आपको उसका ad facebook campagin पर करना है तो आपको एक ad campaign create करना पड़ेगा और यह भी बताना पड़ेगा कि आपको ad कितने दिनों तक करना है। advertiser के लिए facebook ने बहुत अच्छा user friendly ads manager platform create किया है। जिससे कोई भी नया user बहुत ही आसानी से ads को create कर सकता है और publish भी कर सकता है। तो आइए हम हम जानते है की ads campaign को कैसे publish और create किया जाता है।

How to create and publish AD campaign in facebook? ad campaign को facebook में create और publish कैसे करे ?

create a campaign with the reach objective अब how to create facebook ad campaign step by step ad campaign को facebook में create और publish करना सिखाएंगे ।

सबसे पहले तो आपको facebook login करनी होगी । फिर आपको उसके dropdown menu में जाना होगा । वहां आपको बहुत सारे options मिलेंगे ,जिसमे आपको create ad और manage ad का option मिलेगा । इनमे से कोई भी नया ad campaign create करने के लिए , create ads के option पर click करे।

अगर अपने कस option यानी कि create ads के option पर पहेली बार click किया है तो यह आपको एक brief discription देगा और आपको एक नया facebook ads account create करने को बोलेगा । तो अब आपको बस account को कोई भी नया नाम देना है और create के button पर click करना है । हर step में आपको facebook interactive और dynamic interface आपको guide करेगा।

अब facebook ads के interface में आपको हर एक option के side में एक symbol दिखेगा “i” का , आप इस पर अपने mouse का curser जैसे ही लाएंगे तो आपको उस option के बारे में जानकारी आपको मिल जाएगी।

अब इसके बाद facebook ads creation and facebook ad campaign का main page आपके सामने open हो जाएगा। इस open page में बहुत सारे आपको ad campaign के type दिखेंगे , अब इसमें से आपको अपने हिसाब से कोई जो आपको सही लगे वो ad campaign choose करना है।

अलग अलग facebook campaign type आपको अलग अलग promotion देगा जैसे अगर आपको अपनी website पर traffic लाना है तो आपको traffic का option choose करना होगा, अगर आपको conversion करवाना है तो आपको conversion या catalog sales का option choose करना होगा। या फ़िर आपको सिर्फ अपने brand का नाम को popular करवाना है तो आपको brand awareness को choose करना होगा। ऐसे ही बहुत सारे option होते है जिनमे से अप्प अपने हिसाब से कोई भी option अपनी requirement के हिसाब से choose कर सकते है अब हम जानेंगे facebook campaign के ad campaign के बारे में।

CREATE A FACEBOOK AD CAMPGAIN 4 EASY STEP IN HINDI :

किसी भी facebook के ad campaign को create करने के लिए 4 step तो होते ही है । हर step में बहुत सारे options होते है और अलग अलग consideration और marketing objective के हिसाब से आप सबसे पहले first step में choose करते है। हर options को explain नही किया जा सकता क्योंकि marketing objective के options बहुत ज्यादा होते है। इसलिए हमने हर phase का brief intro दिया है जिसके जरिये आप खुद ही ad campaign create कर सकते है।

FACEBOOK CAMPGAIN 4 EASY STEP IN HINDI

How to find facebook ad campagin objectives : Marketing objective को choose करना

जब आप ad create वाले option में account create कर लेंगे तब दुबारा आप इस option में आएंगे कभी भी तो सबसे पहले आपका step आपका अपना marketing objective को choose करना with help of facebook ad manager जैसे conversion , lead generation, brand awareness etc….

Fundamentals of ad set for your facebook ad campagin :Facebook ads set को create करना

अब इसमें हम ad campaign की limit , budget , placement आदि को define करते है। सबसे पहले ad set को facebook ad manager se नाम देना होता है औए इसके बाद audience का चुनाव करना होता है अब इसने audience का चुनाव location के हिसाब से होता है जैसे आप किस किस जगह पर अपना ad show करना चाहते है जैसे कोई city (शहर)में या पूरी country(देश ) मे आदि।

फिर आपको interest set करना होता है जैसे जो जो लोग आपकी define की हुई चीजो में intrested है , केवल उन्ही लोगो को ad show हो।

जैसे जैसे आप audience और interest को choose करते जाएंगे , वैसे वैसे facebook आपको बताते जाएगा calculate करके और यह भी बताएगा कि आप कम से कम और ज्यादा से ज्यादा कितने लोगों तक अपना ad पहुचा सकते है ।

और इसके बाद आपको यह define करना होता है कि आपको अपनी ad कहा कहा show करनी है जैसे facebook desktop version, instagram etc….

Facebook ads set for beginnners full guide step by step : step 1

अगर आप एक beginner है तो आप इसको automatic placement पर ही रहने दीजिए ।इससे ये होगा कि facebook खुद आपकी ad को अलग अलग जगह location पर show कराएगा ।

Facebook campaign ads set for beginnners

इसके बाद आपको अपना budget set करना होगा । इसमे आपको यह set करना होगा कि आपको अपना ad campaign कितने दिन या सप्ताह में कितनी बार दिखाना है। इसकव आप daily basis पर भी set कर सकते हो और weekly basis पर भी set कर सकते हो यह set करना आपके ऊपर है।

How to create a for facebook campaign : AD create करना.


इस option में आपको ad create करना होता है आपको ad को create करने के लिए new ad create करना होगा। या तो अपने किसी facebook page की post को ad के रूप में choose कर सकते हो। और आपको हर ad type के साथ facebook page को link करना होता है ।क्योंकि आपको ad को आपकी facebook campaign page के behalf पर ही दिखाता है।

Facebook campaign : step 2

अब इन सब के बाद आपको ad format choose करना होता है और उसी format के हिसाब से vedios, images को upload करके ,ad को complete करना होता है। ad format option कई प्रकार के होते है तो facebook आपको कई सारे ad format options show करता है जैसे multiple images, single images, single vedios, carousel आदि।
अब आपको call to action button या proper link ऐसे कई option add कर देना होते बे , यह option पूरे आपके marketing objective के के हिसाब से होते है और सब अलग अलग होते है । हर option के आगे advance options दिए होते है जिससे आप अपने ad campaign को highly customize के तरीके से run करवा सकते है।

अब आप ad को completely create कर लेते है इसके बाद आपको अपनी ad को facebook के review के लिए submit करना होता है फिर इसके बाद आपको approval का इंतज़ार करना होगा । approval आपको कुछ minutes में मिल जाता है लेकिन कभी कभी approval मिलने में कुछ घण्टो का भी समय लग जाता है।

आपको approval मिलने के बाद ,आपकी ad, schedule के हिसाब से run होने लगती है और इसके पूरे होने के बाद आपको इसका result आपके ads manager में दिखाई देगा। आप result को ads managers से excel या csv format में export कर सकते है।

Facebook campaign: step 3

अब आपका जितना भी budget बनता है उतने पैसे आपको account में add करने होते है। और आपके account creation के time पर आपकी desire currency भी पूछता है। और आप किसीभी time पैसो को payment setting में जाकर add कर सकते है। और तो और facebook आपको card, net banking और pay tm जैसे payment option भी देता है।

यह भी पड़े : WHAT IS FACEBOOK ADS ?

तो यह थी facebook ad campaign को create करने की पूरी जानकारी आशा करता हूँ आपको पर्याप्त जानकारी प्राप्त हो गयी होगी ।

WHAT IS FACEBOOK ADS ? how to create , benifit ,types of facebook ads for all businesses in 2020

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WHAT IS FACEBOOK ADS ? FACEBOOK ADS kya hai ? how to create , benifit ,types of facebook ads for all businesses in 2020

Facebook Ads (facebook advertisement) फेसबुक एड्स के इस्तेमाल से हम अपने बिज़नेस (business) का प्रचार (advertisement) कर सकते है। यदि आपका किसी भी प्रकार का business है तो या आप किसी का business करना चाहते है तो आप facebook ads का इस्तेमाल कर सकते है। facebook ads एक ऐसा platform है जहाँ हम अपने business की online advertisment कर सकते है। जहाँ advertisers यानी कि जो भी अपने business का ads करना चाहते है वो facebook ads पर अपनी अलग-अलग तरह की post करके अपने business को promote कर सकते है , leads generate(लीडस् जनरेट) करवा सकते है ,facebook page पर likes बढ़ा सकते है,data fill करवा सकते है,और अगर आपकी खुद की website है तो आप अपनी website पर traffic बढ़वा सकते है। और अगर आपका youtube channel है तो आप अपनी vedios पर views बढ़वा सकते है और तो और आप अपनी e-commerce site के लिए conversion करवा सकते है आदि ।

ऐसी बहुत सारी चीजें है जो आप facebook ads को use करके achieve कर सकते है।लेकिन क्या आपको पता है ads को run करवाने के लिए आपको facebook को payment करना होता है। जाहिर सी बात है कि इस दुनिया मे कोई भी किसी के लिए free में काम नही करता या कोई भी काम free में नही होता ।कोई भी काम कराने के लिए बदले में आपको उसको payment करना होता है ।तो ठीक उसी तरह facebook पर ads को run करवाने के लिए आपको facebook को payment करना होता है।

जब आप facebook को payment करेंगे तब facebook आपके ads को run कराएगा। और facebook को जितना payment करोगे ,facebook आपके द्वारा set किये हुए daily budget के हिसाब से आपके ads को run करता है।तो आपको ये तो समझ आ गया होगा कि facebook ads क्या होता है । तो अब हम आपको बताएंगे कि facebook ads को use करने के benefits क्या है।

The Benefits of use Facebook ads (facebook ads को use krne के फायदे):

अगर आपका कोई business है तो आप उसको online promote करने के लिए facebook ads का use कर सकते है। यह एक बहुत ही अच्छा option होता है कोई भी business को बढ़ाने के लिए।

अब आप सोच रहे होंगे कि facebook ads का ही इस्तेमाल क्यों करे business promote करने के लिए , तो इसका इस्तेमाल इसलिए फायदेमंद होता है क्योंकि हर कोई आज कल facebook का इस्तेमाल करता है तो अगर आपके business का ads facebook पर होगा तो ज्यादा से ज्यादा लोग देखेंगे और आपका business या post कुछ भी हो जल्दी promote होगी। और भी कुछ वजह है facebook ads को use करने की , वो हम आपको आगे बताएंगे । जानने के लिए हमारी post पूरी पढियेगा आखिरी तक।

benifit of facebook ads ?

हर महीने करोड़ो लोग social sites जैसे facebook ,instagram use करते है । अगर कोई व्यक्ति 5 मिनट के लिए भी mobile phone चलाता है तो उन 5 मिनट में से भी वो 1 मिनट के लिए facebook या instagram जरूर देखता है और instagram भी facebook की ही property है तो आप facebook ads से instagram पर भी ads के लिए apply कर सकते है या instagram पर बहु ads करवा सकते है। यह plateform ऐसे है जहाँ आप आसानी से कोई भी चीज को आसानी से promote करवा सकते है क्योंकि यहां audience का बहुत बड़ा base होता है। facebook ads की मदद से आप अपने ads को दुनिया के करोड़ो लोगो तक पहुँचा सकते है।

इसके अलावा बहुत से facebook ads के exciting features है,जो कि लोगो को अपनी ओर खींचती है जैसे कि:-

Read this =BEST TIPS OF INVESTMENT IN HINDI :2020

किसी भी budget में आप अपने ads को run करवा सकते है, लेकिन आपका budget जितना ज्यादा होगा आपकी ads उतने ज्यादा लोगो तक पहुँचेगी । इसलिए अगर आपको अपनी ads ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुँचाना है तो आपको अपना budget ज्यादा करना होगा।
जो लोग आपके business में intrested हो केवल उन्हीं लोगों को आपको अपने ads दिखाने है तो ऐसा करने के लिए आपको कुछ options configure करके अपनी targeted audience को नैरो डाउन (narrow down)कर सकते है जैसे demographics(डेमोग्राफिक्स) आदि ।
Advertising purpose के लिए facebook ads हर modern technology और ads format का इस्तेमाल करता है जो हर किसी device पर बहुत अच्छा display होता है। और आप अपनी ads के result को track और analyse भी कर सकते है जिससे आप future में अपने business को और sucessful बना सके।


How to start with facebook ads? (facebook ads कैसे शुरू करे? what is facebook ads manager?

facebook में ads चलाना बहुत ही simple होता है और facebook में ads चलाने को AD campaign भी कहा जाता है।अब आपको हम facebook ads की working को समझायेंगे सबसे पहले तो आपको ये पता होना चाहिए कि आपको किस चीज के लिए ads run कराना है। facebook आपको अलग अलग तरह के Marketing objectives choose करने का option देगा।
जैसे कि how to post ads on facebbok अगर आपको अपनी website पर traffic लाना है तो आपके पास traffic derive करने के लिए एक विचार (consideration)है। और अगर आप लोगो दे डेटा भरवाकर leads generate करना चाहते है तो उनके लिए भी consideration है। ऐसे ही बहुत सारे options होते है facebook ads में जिनकी मदद से आप अलग अलग चीज के लिए facebook ads manager ke through ads run करवा सकते है।

HOW TO CREATE ADS ON FACEBOOK STEP BY STEP :

दूसरा types of facebook ads आप जिन जिनको ads show करवाना चाहते है। उन audiences को चुनिए । आप अलग अलग options को use करके अपनी अपनी audience को चुन सकते है जैसे gender, geographical ,intrest etc…

how to create ads ?


अब इसके बाद आपको यह तय करना होता है की आपको daily कितना paisa लगाना है यानी कि आपको daily budget set करना होगा।
फिर आपको यह तय करना होता कि आपको कितने दिनों या समय में अपना ad चलाना है ।जितने दिन या जितना समय आप चुनेंगे उसी हिसाब से facebook आपको बता देगा कि आपका कितना budget बनेगा ।
इसके बाद आपको ad की visual appearance set करना पड़ेगा जिसमे कुछ चीजे लगाना शामिल होती है जैसे images, vedios, textual information आदि ।

facebook ads manager ?

Types of facebook ads: ad type के हिसाब से ads को शुरू करने के लिए दिए गए options अलग अलग हो सकते है लेकिन इस पोस्ट में बताए गए options common है जो कि हर तरह के ads में काम आएंगे।

आपकी ads को run होने में जितना भी पैसा लगेगा वो facebook ad library आपको पहले ही बता देगा और आपको ads को run कराने से पहले अपने account में जरूरत के हिसाब से सारे पैसे add करने होंगे और उसी के बाद ही आपके ads का campaign run हो पायेगा।

और बाकी इस पोस्ट में हमने ad campaign का जिक्र किया है तो जाहिर सी बात है कि आपके मन me सवाल जरूर आ रहा होगा कि याद campaign क्या होता है । तो इसकी जानकारी हम आपको हमारी अगली पोस्ट में देंगे कि facebook में ad campaign कैसे create और publish करे? , facebook campaign क्या होता है? आदि।

WHAT IS SIP | FULL FORM OF SIP IN HINDI BEST TIPS OF INVESTMENT IN HINDI :2020

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what is sip and full form of sip
what is sip and full form of sip full detail in hindi

WHAT IS SIP? SIP क्या होता है?OR What IS THE Full form of S.I.P?

Meaning of SIP , Benifits of SIP, Full form of SIP, etc…आज हम आपको sip के बारे में पूरी जानकारी देंगे।क्या होता हैsip, इसके फायदे एवं नुकसान ,आदि । sipके बारे में जानने के लिए आपको हमारी पूरी Post को पढ़ना होगा आखिरी तक । तो आइए हम आपको बताते है sip के बारे में।सबसे पहले हम आपको बताएंगे किSIP का पूरा नाम क्या होता है।

What IS THE Full form of S.I.P:-

SIPका फुल फॉर्म “systematic investment plan” है।

WHAT IS SIP | FULL FORM OF SIP

WHAT IS SIP |FULL FORM OF SIP ? SIP किसे कहते है क्या होता है ?

SIP (एसआईपी) एक सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (systematic investment plan) है। SIP एक ऐसा तरीका है जिसके द्वारा हम म्यूच्यूअल फण्ड(mutual fund) में निवेश कर सकते है। SIP के द्वारा हम हर सप्ताह में , महीने में या साल में कुछ amount निवेश नियमित तौर पर निवेश कर सकते है। जिससे एक लंबी अवधि के बाद हमे एक बड़ा amount प्राप्त होता है।

SIP के द्वारा हम MUTUAL FUND में एक fix amount एक fix time में ही  निवेश करते है।इसमें निवेशक हर समय के अंतराल पर समान रकम का निवेश करता है।वह समय निवेशक खुद तय करता है | कि उसको हर सप्ताह INVEST करना है ,हर महीने , या  वर्ष में एक बार, समय कुछ भी तय कर सकता है निवेशक अपनी इच्छा के अनुसार।

SIP में 500 रुपए जितनी छोटी रकम भी निवेश कर सकता है |जो लंबे समय के बाद बहुत लाभ देती है। जो भी रकम आप नियमित अंतराल पर निवेश करना तय करते है वो उसी अंतराल पर आपके Bank account से कट जाती है।इस योजना में आप कभी भी निवेश की रकम को बढ़ा सकते है या निवेश करना बंद कर सकते है।SIP में आप एक तय  समय सीमा तक ही निवेश करते है । और ये आपको long term पर आपको अच्छा फायदा देती है।

अगर आप नियमित तौर पर इसमे निवेश करते है तो आपको कंपाउंडिंग (compounding) के असर से फायदे (benifits) नज़र आएंगे। यह तय करता है कि return आपकी मुख्य राशि न हो , बल्कि आपकी राशि पर हुए मुनाफा भी हो । इसमे आपके पैसे समय के साथ बढ़ते जाते है, क्योंकि आप जो  निवेश करते है वह return कमाता है और return का भी return कमाता है। इसलिए जितना जल्दी हो सके आपको इसमे निवेश करना चाहिए ताकि एक लंबे समय के बाद आपको अच्छा बड़ा फायदा मिल सके।

BEST Tips Of Investment IN SIP ?

सबसे पहले तो आप एक लक्ष्य बनाए की इतने समय के लिए आपको निवेश करना है।फिर एक रकम तय करे जो आप निवेश करेंगे। आप रकम तय SIP calculator की मदद से कर सकते है।

एक समय अंतराल भी तय करे जिसमे आपका निवेश होता रहेगा। वह समय अंतराल सप्ताह में भी हो सकता है , या महीने में भी या वर्षिक भी हो सकता है यह आपके ऊपर है कि आप कोनसा समय अंतराल चुनते है निवेश करने के लिए।

best tip to invest in sip

अपने financial advisor से contact करे । और एक अच्छी योजना बनाये जो आपकी जरूरत के हिसाब से होगी।रकम को निवेश करने के लिए आप पैसे post dated check(पोस्ट डेटेड चेक ) या फिर। ECS (Electronic Clearing Machine) के द्वारा दे सकते है।जिसमे आपको अपने bank की कुछ जानकारियां देनी होंगी ।ताकि हर समय के अंतराल में आपकी तय हुई राशि जुसमे से कट जाए।

आपके पैसे mutual fund में निवेश किये जाते है तो आप mutual fund की company में जाकर भी अपने निवेश की जानकारी प्राप्त कर सकते है।

WHY SIP INVESTMENT IS BEST WAY TO INVEST IN SIP? SIP में निवेश क्यों करना चाहिए?

SIP में निवेश का सबसे बड़ा फायदा तो यह है कि इसमें bazaar से जुड़े जोखिम कम होते है ।वो इसलिए क्योंकि आपके पैसो का प्रबंधन एक्सपर्ट (experts) द्वारा किया जाता है। experts लगातार company, industries, और economy पर research करते रहते है।

research के बाद वह आपके पैसो को सही जगह निवेश करते है और लगातार वह बाजार पर नज़र रखते है। अगर आप बाजार के बारे में ज्यादा जानकारी नही रखते है या फिर आपके पास समय नही है कि बाजार पर आप नज़र रख सके तो SIP आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।

अलग-अलग कंपनियो में निवेश होता है आपका पैसा SIP में निवेश करने का दूसरा फायदा यह है कि आपका पैसा अलग -अलग sector की अलग अलग company में निवेश किये जाते है। अलग अलग company में आपका पैसा निवेश करना इसलिए फायदेमंद होता है क्योंकि जैसे अगर एक company में या किसी  एक sector में नुकसान हो गया ,तो भी आपके return पर ज्यादा असर नही पड़ेगा क्योंकि उसकी भरपाई दूसरे sector या company से हो जाएगी।

mutual fund industry ,सरकारी नियमो के तहत काम करती है। mutual fund industry SEBI और AMFI के बनाये नियमो के अनुसार काम करती है।

Mutual fund के काम करने का तरीका पारदर्शी है इसलिए इसमें निवेश पूरी तरह से सुरक्षित रहता है।कभी भी आप निवेश कर सकते है।इसका एक और बड़ा फायदा यह है कि SIP में आप कभी भी निवेश कर सकते है। इसमे आपको यह नही सोचना पड़ता कि कब निवेश करे कब नही, बाजार में गिरावट है या तेज़ी यह सब आपको नही सोचना पड़ता।

SIP में आप नियमित तौर पर थोड़ा थोड़ा पैसे निवेश करते है इसमें निवेश का समय मायने नही रखता।आपके बजट पर असर नही पड़ता। SIP में आप छोटा amount भी निवेश कर सकते है |

जैसे 500 से 1000 रुपए भी आप निवेश कर सकते है।जिससे आपके बजट पर भी कोई खास फर्क नही पड़ता । अगर आप मिडिल क्लास फैमिली से है तो एसआईपी में निवेश करना आपके लिए आसान होता है और एक  समय के बाद आप एक बड़ा amount ले सकते है।

आपके सपने पूरे करने में मददगार साबित होता है।हम जो भी पैसा निवेश करते है उसका कुछ न कुछ लक्ष्य जरूर होता है जैसे बच्चो की पढ़ाई , बच्चो की शादी,या घर खरीदना आदि इन सब चीजो के लीज बड़े amount की जरूरत होती है और इतना बड़ा amount जुटाना बहुत मुश्किल होता है।

लेकिन  आप SIP के जरिये धीरे धीरे एक बड़ा amount जुटा सकते है।Benifits Of SIP की फायदे में निवेश कर हम किसी भी company के fund में निवेश कर Units खरीदते है।

जैसे हमने किसी company के fund का NAV 10 रुपए है तो उसमे आपने 1000रुपए निवेश कर दिए है तो उन 1000 रुपए के बदले में आपको 100 units प्राप्त हो जाएगी। और जब भी आप units को बेचना चाहेंगे तो आपकी खरीदी हुई unit को उस समय के बाजार के भाव पर बेचकर मुनाफा कमा सकते है।

वैसे SIP के बहुत सारे  benifits है जैसे  tax में छूट ,निवेश में सरलता, छोटा निवेश,, कम risk , benifit of compounding, आदि । OR WHAT IS SIP |FULL FORM OF SIP तो आइए अब हम आपको एसआईपी के फायदे बताते है।

यह भी पढ़े: HOW TO INVEST IN SHARE MARKET शेयर बाजार में निवेश कैसे करे ?

WHAT ARE THE BENIFIT OF SIP?

(1) छोटा निवेश(small investment):- जैसे कि हमने आपको पहले ही बता दिया कि आप एसआईपी में छोटा amount भी निवेश कर सकते है। इससे आपको निवेश करने में कोई दिक्कत भी नही आएगी और एक समय के बाद आपको बड़ा amount मिलता है।अगर आप हर महीने 10% intrest return rate से 1000रुपए निवेश करते है तो 15 साल में आपकी अवधि पूरी होने पर लगभग आपको 4,14,470 रुपए मिलेंगे । जबकि आपने सिर्फ 15 साल में 1,80,000 रुपए ही जमा किये होंगे।

(2) निवेश करने में आसानी :-इसमे आपको निवेश करना बहुत ही आसान होता है।बस एक बार अपने plan चुनने के बाद एक तय समय को mutual fund आपके account से राशि निकालकर आपके चुने हुए plan में जमा कर देती है। आवक bank account आपके SIP scheme वाले account से link होता है। जैसे हर महीने आपको 500रुपए निवेश करना है तो आपके bank account से हर नहींए 500रुपए SIP account में transfer कर दिए जाते है। और उन पैसो का इस्तेमाल units खरीदने के लिए किया जाता है।

(3)कम रिस्क:- SIP की सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें जोखिम बहुत कम होता है क्योंकि जो भी पैसा हम निवेश करते है वो financial advisor के द्वारा निवेश करते है और वह बाजार पर नियमित तौर पर नज़र रखते है तो आपके पैसे डूबने ला खतरा कम रहता है।

(4) tax में छूट:- जब भी आप एसआईपी में निवेश करते है या निकलते है तो उस पर किसी भी तरह का tax नही लगता । पर tax की छूट देने वाले scheme में lock in period होता है जैसे कि 3 वर्ष आप इनमें निवेश करके tax में छूट पा सकते है।

(5) Benifits of compounding:- compounding का मतलब होता है intrest पर भी intrest मिलना । जब भी आप SIP में निवेश करते है तो उस निवेश पर जो भी return मिलता है उस return को वापस निवेश कर दिया जाता गए जिससे निवेशकों का profit बढ़ जाता है और उसको मुनाफे में वृद्धि होती है।

(6) SIP से पैसे निकालने की सुविधा:– ज्यादातर SIP scheme में कोई भी lock in period नही होता। lock in period वह समय होता है जिसके  बिना पूरे हुए आप scheme में से अपने paise निकल सकते है । पर SIP की ज्यादातर schemes में lock in period नही होता। निवेशक अपनी जरूरत  के अनुसार एसआईपी में निवेश जारी रख सकते है या बंद कर सकते है।

SIP में आप अपने हिसाब से निवेश कर सकते है ।इसमें आपको mutual fund चुनने की जरूरत नही पड़ती इसमे ज्यादातर चीजे automatic होती है  और इसमे मिलने वाले लाभ बहुत ज्यादा होते है और इसमे नुकसान न के बराबर होते है।अगर आपका थोड़ा सा भी पैसा अपने दैनिक जीवन से बच रहा है तो आपको एसआईपी में जरूर invest करना चाहिए । भले ही आपको लगे कि इतने लंबे समय के लिए करना पड़ रहा ह या इतना छोटा amount कर रहे है कब तक इक्खता होगा । तो यह सब आप चिंता छोड़ दीजिए आप तो बस invest करना शुरू कीजिए कब समय निकल जाता है आपको पता ही नही चलेगा । तो आप इसमे इन्वेस्ट करिए एक समय के बाद आपको इक्खता पैसा मिलेगा और उस पैसो को आप जैसे चाहे  इस्तेमाल कर सकते है।

आशा करता हूँ कि आपको SIP के बारे में सब समझ आ गया होगा।  ऐसे ही और जानकारी पाने के लिए आप हमारी website पर आये।

WHAT IS HTTP | HTTP की पूरी जानकारी हिंदी में in 2020

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WHAT IS HTTP
HTTP world wide web WHAT IS HTTP HTTP KYA HAI

HTTP क्या है ? HTTP कैसे काम करता है? HTTP का फुल फॉर्म क्या है? HTTP की पूरी जानकारी हिंदी में जानिए।

What is HTTP?( HTTP क्या है?)

HTTP world wide web की जड़ होती है, और Hypertext link का इस्तेमाल web page load करने के लिए किया जाता है । HTTP एक network protocol है, इसका इस्तेमाल web पर एक जगह से दूसरे जगह data भेजने के लिए किया जाता है। इसे web page पर data transmission के लिए दी जाने वाली command और service के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

What is HTTP

HTTP technology web server और web users के बीच communicate करने के लिए इस्तेमाल की जाती है। यह protocol बड़े , multi functioning , multi-input system base है ।

जैसे world wide web(www). जैसा कि हम जानते है web बिना communication process के function नही करेगा ,क्योंकि link ठीक से काम करने के लिए HTTP पर depend होती है।

Web browser की मदद से हम internet पर हम जो भी ढूंढते है, उसका एक address होता है , उसे हम URL (uniform resource location) कहते है। इसमें आपको सबसे पहले HTTP फिर www दिखता है। यह आपको हर website के link में दिखेगा और इसी के जरिये कोई भी file आपके system में पहुँचती है।

web page के सामने http:// enter करने पर browser को HTTP पर communication करने के लिए कहता है। आज के browsers को URL के सामने HTTP की जरूरत नही होती ,क्योंकि यह communication की default method है।

HTTP एक client server protocol होता है। आपका computer, mobile, laptop कोई भी device जो वेब server को सूचना देने के लिए request करती है उसे हम client कह सकते है। इसे user agent भी कहा जा सकता है। यह पहले सिर्फ HTML file या data transfer करता था ,लेकिन अब इसका इस्तेमाल images, audios file, vedio आदि सभी को transfer करने के लिए किया जाता है।

HTTP client server protocol

HTTP protocol को www और internet engineering task force ने मिल कर विकसित किया था। यह web browser microsoft , chrome, internet explore और web server जैसे internet information services के बीच files को send एंड receive करने की process को manage करता है।

HTTP का फुल फॉर्म क्या होता है?(full form of HTTP)

HTTP का फुल फॉर्म “Hyper Text Transfer Protocol होता है।

EVOLUTION OF HTTP? HTTP का इतिहास (History of HTTP )

HTTP का विकास 1989 में CERN में टिम बर्नर्स ली (Tim berners-Lee) द्वारा किया गया था। RFCs के लिए शुरूवादी HTTP अनुरोधों का विकास internet engineering task force और www कंसोर्टियम (W3C) द्वारा समन्वित प्रयास था और बाद में फिर HTTP में चले गए।

HTTP 1.1 को पहेली बार 1997 में RFC 2068 में प्रलेखित किया गया था। उस विनिर्देश को 1999 में RFC 2616 द्वारा पालन किया गया था, जो 2014 में RFC के RFC 7230 परिवार द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था।

HTTP SERVER

HTTP 2 2015 में प्रकाशित हुआ था। यह लगभग सभी Web browser और transport layer security के web servers द्वारा एक application layer protocol extension का इस्तेमाल करके समर्थित है जहाँ TLS 1.2 या नया आवश्यक है।

HTTP 3 , HTTP 2 का प्रतावित उत्तराधिकारी है जो पहले से ही web पर उपयोग में है। http 2 की तरह यह protocol के पिछले प्रमुख संस्करणों को अप्रचलित नही करता । HTTP3 के लिए समर्थन कोseptember 2019 में cloudflare और google chrome में जोड़ा गया था और इसे chrome और firefox के स्थिर संस्करणों ने सक्षम किया जा सकता है।
HTTP कैसे काम करता है?(How to work http in hindi?)

HTTP एक client server communication model का इस्तेमाल करता है ,जो कि TCP के top पर बनाया गया एक application layer protocol है।

HTTP client और server , HTTP request और response message के द्वारा communication करते है। 3 मुख्य HTTP type GET , POST और HEAD है।

GET:- किसी server पर भेजे जाने वाले HTTP GET message में केवल 1 URL होता है। 0 या उससे अधिक option data parameter URL के अंत मे जोड़े जा सकते है। server URL के optional data portion को process करता है और browser को result देता है।

POST:- HTTP POST message को URL के आखरी में add करने के बजाए request message body में कोई optional data parameter रखता है।

HTTP HEAD:- यह GET request के समान काम करता है। URL के पूरे contant के साथ reply देने के बजाए , server केवल header information(HTML section के अंदर) को वापस भेजता है।

browser server से एक TCP connection शुरू करके एक HTTP server के साथ communication शुरू करता है। web browsing सेशन default रूप से server port 80 का इस्तेमाल करता है।

एक सेशन के stablish होने के बाद , user web page पर जाकर HTTP message send and receive करने के लिए ट्रिगर करता है।

WHAT IS HTTP ERROR? Issues with HTTP

HTTP पर transmit होने वाले message कई बार कई कारणों से डिलीवर नही हो पाते है।

user errors with http
web browser या web server में खराबी ।

http web page के creation में error।

http temporary network विलम्ब।

जब ये नाकामयाब होते है तब protocol failer के कारणों को capture करता है और error code के एक HTTP status line/code browser को वापस भेज देता है। यह error कुछ numbers से start होते है । जो ये बताते है कि यह error किस प्रकार का है।

जैसे 4xx error ये बताता है कि page के लिए request ठीक से पूरा नही किया जा सकता या request में गलत syntex है। ऐसे ही 404 error है जो ये बताता है की page नही मिला ।

WHAT IS HTTP ERROR?

what is http error

HTTP पर transmit होने वाले message कई बार कई कारणों से डिलीवर नही हो पाते है।
user errors with http
web browser या web server में खराबी ।
http web page के creation में error।
http temporary network विलम्ब।

EVOLUTION OF HTTP? HTTP का इतिहास

HTTP का विकास 1989 में CERN में टिम बर्नर्स ली (Tim berners-Lee) द्वारा किया गया था। RFCs के लिए शुरूवादी HTTP अनुरोधों का विकास internet engineering task force और www कंसोर्टियम (W3C) द्वारा समन्वित प्रयास था और बाद में फिर HTTP में चले गए।
HTTP 1.1 को पहेली बार 1997 में RFC 2068 में प्रलेखित किया गया था। उस विनिर्देश को 1999 में RFC 2616 द्वारा पालन किया गया था, जो 2014 में RFC के RFC 7230 परिवार द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था।

WHAT IS THE FULL FORM OF HTTP?

what is http

HTTP का फुल फॉर्म “Hyper Text Transfer Protocol होता है।

ह भी पढ़े >What is wifi history?

उम्मीद है आपको हमारा ये article अच्छे से समझ आया होगा। please share this article .

WHAT IS MSME? FULL FORM ,TYPES,BEST MEANING, LOAN IN HINDI 2020

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what is msme
what is msme

WHAT IS MSME? एमएसएमई क्या होता है।?

एमएसएमई मतलब होता हैं शुक्ष्म , लघु और मध्यम उद्योग होता हैं । अगर हमे इसको आसान भाषा मे समझना है तो इसको आसान भाषा मे कहते है छोटे और मध्यम उद्योग या कारोबार । MSME एमएसएमई देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता हैं। MSME भारत की GDP जीडीपी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। एमएसएमई उद्योग स्थानीय स्तर पर किये जाने वाला कारोबार होता हैं। इस तरह का उद्योग कम लोगो के माध्यम से कम जगह पर आसानी से किया जा सकता हैं।

FULL FORM OF MSME ?एमएसएमई का पूरा नाम?

MSME का फुल फॉर्म होता हैं =  Ministry of Micro, Small & Medium Enterprises  ( माइक्रो , स्माल एंड मीडियम एंटरप्राइज)
इसे हिंदी में कहते है , शुक्ष्म , छोटे और मध्यम उद्योग ।

IMPORTANCE OF MSME? एमएसएमई का महत्व?

भारत की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई msme का कुल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष निर्यात में 45% हिस्सा है। केंद्रीय और राज्य सरकार और बैंकिंग एमएसएमई msme अधिनियम के तहत लाभ को प्राप्त करने के लिए एमएसएमई पंजीकरण होना आवश्यक है । इसके तहत आपको व्यापार में कई तरह के लाभ उपलब्ध होंगे जैसे:- ब्याज की कम दर , उत्पाद शुल्क में छूट , योजना कर सब्सिडी आदि । लेकिन छूट को प्राप्त करने के लिए आपको उद्योग आधार पंजीकरण कराने आवश्यक है।

TYPES OF MSME ? एमएसएमई के प्रकार ?

एमएसएमई msme शुक्ष्म , छोटे ,और मध्यम इस तीनो श्रेणियों के उद्योगों में से किसी भी उद्योग के अंतर्गत आ सकता हैं।। एमएसएमई msme उद्योग किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ होती हैं । यह सभी के लिए समान विकास और आर्थिक विकास को भडावा देने का कार्य करती हैं। तीनो श्रेणियों के एमएसएमई उधोग का वर्णन निम्नलिखित हैं:-

माइक्रो या शुक्ष्म उद्योग (micro enterprise) :- माइक्रो या शुक्ष्म उद्योग सबसे छोटी संस्था होती हैं , इसमे विनिर्माण व्यापार के अंतर्गत संयंत्र और मशीनरी में कम से कम 1 करोड़ तक का निवेश कर सकते हैं । जिसका टर्नओवर(turnover)5 करोड़ तक होना चाहिए।

small enterpriseलघु उद्योग:- लघु उद्योग के अंतर्गत हम छोटे विनिर्माण उद्योग के लिए संयंत्र और मशीनरी में 10 करोड़ निवेश कर सकते है, जिसका टर्नओवर (turnover) कम से कम 50 करोड़ होना चाहिए।

Medium enterprise मध्यम उद्योग:– मीडियम या मध्यम उद्योग के लिए सयंत्र और मशीनरी में 30 करोड़ का निवेश कर सकते है। जिसका टर्नओवर (turnover) कम से कम 100 करोड़ तक होना चाहिए।

How many types of MSME IN INDIA:

Msme उद्योग मुख्य रूप से दो प्रकार के होते है जैसे :-

(1) मैनुफैक्चरिंग उद्योग (Manufacturing Enterprise)

(2) सेवा उद्योग (Service Sector)

Manufacturing Enterpris मैनुफैक्चरिंग उद्योग:- मैनुफैक्चरिंग मतलब होता होता हैं ,कोई नई चीज को बनाना । और मैनुफैक्चरिंग उद्योग मतलब होता हैं , जिस जगह नई चीज का निर्माण करने का कार्य होता हैं।


मैनुफैक्चरिंग (manufacturing) अंग्रेजी शब्द होता हैं। इसका हिंदी में अर्थ होता है:-विनिनिर्माण होता हैं। विनिनिर्माण का अर्थ होता हैं किसी चीज का निर्माण करना। msme (एमएसएमई) के मैनुफैक्चरिंग उद्योग के अन्तर्गत विभिन्न तरह के उपयोगी प्रोडक्ट का निर्माण किया जाता हैं।उदहारण के तौर पर हम ब्रेड बनाने की फैक्ट्री ।

Service Sector सर्विस सेक्ट:- सर्विस सेक्टर में मुख्य रूप से सेवा देने का कार्य किया जाता है। इसे सेवा क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता हैं। इस सेक्टर में लोगो और संस्थाओ को सर्विस देने का कार्य किया जाता हैं।


MSME एमएसएमई उद्योग के तहत सर्विस उद्योग की बात करे तो इसमें ट्रेवल एजेंसी , रेस्टोरेंट , कर्मचारी उपलब्ध करने तक का बिज़नेस सर्विस सेक्टर के रूप में जाना जाता हैं।

Profit of MSME Registration Certificate:एमएसएमई में उद्योग का पंजीकरण होने से मिलने वाले लाभ:-

Profit from banks बैंको से लाभ:- सभी बैंक और अन्य वितीय संस्था एमएसएमई को जानते हैं इसलिए आपको आने व्यवसाय के लिए ऋण कम ब्याज दर पर आसानी से मिल सकता हैं। एमएसएमई को दी हुई ऋण पर ब्याज की दर सामान्य व्यापार की ब्याज दर से 1 या 1.5 प्रतिशत कम होती है।

Profit of Registration

State government exemption राज्य सरकार द्वारा छूट:- राज्य उन लोगो को बिजली , कर और उद्योगिक सब्सिडी देती है , जिन्होंने अपने व्यापार को एमएसएमईडी अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत किया है। उन्हें राज्य सरकार द्वारा विशेष रूप से बिक्री कर में छूट मिलती हैं।

Tax benefits कर लाभ:- व्यवसाय कर आधार पर एमएसएमई में पंजीकृत होने के बाद एक्ससाइज छूट योजना का लाभ ले सकते हैं, व्यवसाय के शुरुवात के कुछ वर्षों में…


PROCESS OF MSME REGISTRATION :एमएसएमई में पंजीकरण का तरीका:-

There are two ways you can register in MSME ?

First offline and second online.

MSME में आप दो तरह से पंजीकरण कर सकते हैं । पहला ऑफलाइन और दूसरा ऑनलाइन ।

(MSME registration offline) ऑफलाइन पंजीकरण:-

जिस विभाग के लिए आप उद्योग शुरू कर रहे हैं, उसके साथ आवेदन पत्र में जो आपकी सूचना है उसे भर ले , उसके बाद उससे संबंधित दस्तावेज के साथ एमएसएमई आफिस में पंजिकृत कर ले। दस्तावेज और आवेदन को जमा करने से पूर्व किसी विशेषज्ञ से सारे दस्तावेज प्रमाणित कर ले , उसके बाद आवेदन को जमा कर दे, आप जिस जिले में अपना उद्योग शुरू कर रहे है , वहां के जिले उद्योग में केंद्र में जाकर आवेदन जमा कर सकते हैं। इसके बाद आपके आवेदन को आपके दस्तावेज के साथ एमएसएमई रजिस्ट्रार के पास फ़ाइल किया जाएगा , फिर विशेषज्ञ उसका सत्यापन करेंगे । सत्यापन के दौरान आपके सभी दस्तावेज और आवेदन पत्र सही मालूम होने के बाद आपका आवेदन स्वीकृत हो जाएगाज़ उसके बाद आपको एमएसएमई प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा और आपको कोरियर या ईमेल के माध्यम से सूचित कर दिया जाएगा।

MSME Registration Online (ऑन लाइन पंजीकरण):-

भारत सरकार द्वारा दिये गए पोर्टल या लिंक पर जाकर दिए गए निर्देश के अनुसार आधार संख्या , मालिक का नाम , आदि को भरने के बाद आवेदन जमा कर दे।

Registration


उसके बाद आपको पंजिकृत नंबर या ईमेल पर एक ओटीपी (otp) आएगा , जिसे आपको आवेदन में भरना होगा और नीचे दिए गए कैप्चा को आवेदन में डालकर जमा करना होगा।
और जब आप एमएसएमई (msme) उद्योग शुरू करते हैं , तब आपको एक आखिरी पंजीकरण के लोए आवेदन करना होता हैं , जिसके बाद आपको एक अंतिम एमएसएमई प्रमाण पत्र दिया जाता हैं। उत्पादन शुरू होने के बाद आप स्थायी प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कर सकते है।

How to apply MSME Loan? (एमएसएमई लोन के लिए आवेदन कैसे करे?)

MSME लोन के लिए दो तरह से आवेदन कर सकते हैं। ऑफलाइन एवं ऑनलाइन । ऑनलाइन आवेदन के लिए msme.gov.in में जाकर आवेदन कर सकते हैं।

Who can apply for MSME loan ? (एमएसएमई लोन के लिए आवेदन को कर सकता हैं?

राज्य या सेंट्रल की कोई भी आर्गेनाइजेशन (organization) इंडस्ट्री / एंटरप्राइज ।
यह लोन उसी को मिल सकता हैं ,जो कंपनी एक्ट के तहत रजिस्टर हो । जो आर्गेनाइजेशन (organization ) कम से कम 3 साल से काम कर रही हो और उसका रिकॉर्ड (record) अच्छा रहा हो । जिस कंपनी ने पिछले 3 साल में लगातार ऑडिट (audit) भरा हो ।

Limit of MSME Loan एमएसएमई लोन की लिमिट:-

Very Small Businessशुक्ष्म के लिए1 करोड़
Small Businessलघु के लिए10 करोड़
Large Businessमध्यम के लिए20 करोड़

How much is the loan available under MSME? एमएसएमई के तहत लोन कितना मिलता हैं?

एमएसएमई के तहत लोन 1 करोड़ से 20 करोड़ तक मिलता हैं।

What is the interest rate for taking an MSME loan?एमएसएमई लोन लेने पर ब्याज (interest) रेट क्या हैं?

एमएसएमई लोन पर ब्याज दर 8.30 – 6.25 के बीच है।

MSME Registration Requirement Documents (एमएसएमई में लगने वाले दस्तावेज)?

आदि (इनमे से कोई भी एक पहचान प्रमाण पत्र के रूप में आपके पास मौजूद होना आवश्यक है।)
पासपोर्ट साइज की फ़ोटो
अन्य दस्तावेज (other document)

अगर आप किराये की संपत्ति पे उद्योग करते हैं , तो किराया समझौता का दस्तावेज
स्वामित्व वाली सम्पत्ति के लिए सौदे का दस्तावेज या सम्पत्ति का दस्तावेज एफिडेविट (शपथपत्र)
घोषणा दस्तावेज
एन ओ सी
साक्षी के रूप में 2 व्यक्ति।

यह भी ढ़े एफएसएसआई से जरूरी है मंजूरी लेना?

उम्मीद है आपको हमारा ये article अच्छे से समझ आया होगा।

FSSAI Full Form, FSSAI License, Rules – Food Safety and Standards Authority of India 2020

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fssai full information in hindi
Food Safety and Standards Authority of India

What is the full form of F.S.S.A.I.? FSSAI का पूरा नाम होता हैं:-

Full form of FSSAI:- Food Safety and Standard Authority of India (FSSAI) भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक नियम।

When was FSSAI established? FSSAI की स्थापना कब हुई?

FSSAI यह 5 अगस्त सन 2008 में शुरू हुआ था। लेकिन इसको 2006 के अनुसार ही प्रयोग में लाया गया था।

The objective of FSSAI का उद्देश्य :- FSSAI को इसलिए स्थापित किया गया था, ताकि देश में बिकने वाले खाद्य पदार्थो की शुद्धता जांच सके।

भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम क्या है? What is the Food Safety and Standards Act of India?

FSSAI भोजन कि गुणवत्ता को जाचने के लिए होता हैं। भोजन में कई प्रकार की चीजो का इस्तेमाल होता हैं , तो उससे किसी को भी कोई नुकसान नही हो , इसलिए एफ एस एस आई भोजन की जांच करता हैं , की भोजन खाने से किसी को कोई नुकसान न हो । भोजन में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक , पोषण गुणों , भोजन के रंग , महक, आकार , आदि की जांच करता हैं । जांच में जब सब चीजें सही पाई जाती हैं तब जाके उसे मार्किट में बेच जाता है। 2006 के अधिमियम अनुसार एफएसएसआई भोजन में मिलावट पर नियंत्रण का कार्य करता हैं।

एफएसएसआई के आने के बाद खाद्य पदार्थ से जुड़े कुछ अधिनियम – Repealed Acts/Orders – FSSAI

एफएसएसआई के आने के बाद खाद्य पदार्थ से जुड़े कुछ अधिनियम थे , जिनको एफएसएसआई के आने के बाद खत्म कर दिया गया।खत्म किये गए अधिनियम के नाम है:-

【1】खाद्य व्यभिचार अधिनियम 1954
【2】फल उत्पाद आदेश 1955
【3】मांस खाद्य उत्पाद आदेश 1973
【4】वनस्पति तेल उत्पाद आदेश 1947
【5】खाद्य तेल पैकेजिंग विनियमन आदेश 1988
【6】साल्वेंट एक्सट्रेक्टेड ऑयल 【7】डी-औमेड मेल एंड डेसिबल फ्लोर आदेश 1967
【8】दूध और दूध उतलाद आदेश 1992

Where is the headquarters of FSSAI?एफएसएसआई का मुख्यालय कहा है?

FSSAI is headquartered in New Delhi. एफएसएसआई का मुख्यालय नई दिल्ली में हैं।

भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के मुख्यालय नई दिल्ली में है। और वही पर इसके अध्यक्ष तथा मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति भारत सरलर के द्वारा की जाती हैं। इसके अध्यक्ष भारत सरकार के सचिव रैंक के होते हैं। और नई दिल्ली के अलावा भी इसके 6 सहित क्षेत्रीय कार्यलय पूरे देश में हैं जैसे:- दिल्ली, मुम्बई, गुवाहाटी,कोचीन, कोलकाता, चेन्नई। इसके अलावा भी कई लेबोरेट्रीज पूरे भारत भर में स्थित है।

headquarters of FSSAI

What are the products covered under FSSAI? एफएसएसआई के अंतर्गत आने वाले उत्पाद कौन-कौन से होते हैं ?

एफएसएसआई निम्नलिखित खाद्य उत्पादों का मानदंड निर्धारित करती हैं और ये सुनिक्षित करती हैं कि इन उत्पादों का उत्पादन उसके द्वारा बनाये गए नियम के अनुसार किया जाए और ये खाद्य लोगो की सेहत के लिए सही हैं।

【1】पेय पदार्थ
【2】नामक, मसलो और संबंधित उत्पाद 【3】मिठाई
【4】मछली उत्पाद
【5】मांस उत्पाद
【6】अनाज उत्पाद
【7】सब्जी और फल उत्पाद
【8】तेल और वसा
【9】डेयरी उत्पाद

functions, duties and responsibility of food safety regulators? एफएसएसआई के क्या कार्य होते है?

FSSAI has been set up by the Government of India to perform the following functions.

एफएसएसआई को भारत सरकार द्वारा निम्नलिखित कार्यो को करने के लिए स्थापित किया है।

एफएसएसआई के कार्य नीचे बताए गए हैं , जो कि इस प्रकार हैं:-

【1】FSSAI Set guidelines दिशा-निर्देश को निर्धारित करना :- एफएसएसआई का सबसे महत्वपूर्ण काम यह हैं कि वह खाद्य वस्तुयों से जुड़े दिशा- निर्देश जारी करते हैं और ये सुनिक्षित करते हैं कि उनके बनाये हुए दिशा -निर्देश का पालन देश भर में किया जा रहा है या नही।

【2】FSSAI Certification प्रमाणन देना:- एफएसएसआई का दूसरा महत्वपूर्ण काम यह होता हैं कि व्यवसायियों के द्वारा बनाये गए खाद्य की जांच करना और ये सुनिक्षित करना कि उनके द्वारा बनाये बनाया हुआ खाद्य लोगो के खाने योग्य है कि नही । अगर जांच करने पे खाना सही पाया जाता हैं तो उसे प्रमाणन दिया जाता हैं।

【3】FSSAINetwork setup नेटवर्क की स्थापना:- हर काम मे नेटवर्क की स्थापना करना बहुत जरूरी होता हैं। अपने देश मे एक सूचना नेटवर्क की स्थापना करना जरूरी हैं जिससे कि आम उपभोत्ता , पंचायत आदि खाद्य संरक्षा और उससे जुड़े मुद्दों के संबंध में आसानी से सूचना प्राप्त कर सके।

【4】FSSAI प्रशिक्षण देना:- business चाहे कोई भी हो , जो लोग उस व्यवसाय में काम कर रहे होते हैं उन्हें वक्त वक्त पर प्रशिक्षण कार्यक्रमो का आयोजन करना जिसके जरिये व्यवसायों से जुड़ी जानकारी दी जा सके। उसी प्रकार खाद्य व्यवसायों में जो लोग शामिल है या शामिल होना चाहते है उनके लिए भी प्रशिक्षण कार्यक्रमो का हिना जरूरी हैं जिससे उन्हें खाद्य व्यवसायों से जुड़ी जानकारी दी जा सके।

एफएसएसआई से जरूरी है मंजूरी लेना? FSSAI product approval?

एफएसएसआई का मुख्य काम खाद्य मार्केटिंग , बिक्री, भंडार , आपूर्ति और विनिर्माण को नियंत्रित करना है। किसी भी निर्माता को उसके खाद्य पदार्थ को बेचने से पहले एफएसएसआई में application देना पड़ता हैं। जिसके बाद एफएसएसआई अधिकारी आवेदनों के खाद्य उत्पादों के प्रयोगशाला परीक्षण के आधार पर उन्हें प्रमाण पत्र जारी करते हैं और खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत कानूनी कार्यवाही का प्रावधान भी हैं। एफएसएसआई के अधिकारी किसी भी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर सकते हैं जो खराब खाने का सामान को बेचना हैं।

एफएसएसआई से जरूरी है मंजूरी लेना? FSSAI product approval?

Who can apply for FSSAI license? एफएसएसआई लाइसेंस के लिए कौन आवेदन दे सकता हैं?

एफएसएसआई खाद्य व्यापार और कारोबार की प्रकति के आधार पर लाइसेंस जारी किया जाता हैं। जिन कारोबारियो का कारोबार 12 लाख से 20 करोड़ के बीच का होता है , वो कारोबारी राज्य लाइसेंस के अंतर्गत आते है।

और जिन कारोबारियो का कारोबार 20 करोड़ से ऊपर है , वल केंद्रीय लाइसेंस की श्रेणी में आते हैं।

Food License Canceled or Suspended | FSSAI Food License? लाइसेंस कैसे रद्द किया जा सकता हैं?

अगर आपको लाइसेंस मिल जाता हैं और लाइसेंस मिलने के बाद आपके द्वारा बनाये गए खाद्य पदार्थो में कोई कमी या खराबी दिखती या फिर एफएसएसआई के द्वारा तैयार किये गए मनको पर सही नही पाया जाता है , तो आपका लाइसेंस रद्द किया जा सकता हैं। इसलिए लाइसेंस मिलने के बाद भी आप अपने उत्पादों की शुद्धता से कोई समझौता ना करे , अपने खाद्य उत्पादों की शुद्धता को बरकरार रखे नही तो आपको भारी पड़ सकता हैं।

यह भी पढ़ेजानिए कैसे बन सकते है IPS ऑफिसर?)

उम्मीद है आपको हमारा ये article अच्छे से समझ आया होगा।

Wi-Fi Definition and Meaning ? WIFI Full information 2020

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WIFI
WIFI DEFINATION AND MEANING

What Is Wi-Fi ? Wi-Fi definition and meaning WIFI Full information in hindi

Wi-Fi

Wi-Fi definition and meaning in hindi > WIFI क्या है : Wifi एक लोकप्रिय Wireless Networking Technology है। यह एक ऐसी टेक्नोलॉजी है, जिसके जरिये हम internet और network connection का इस्तेमाल कर रहे है।आसान भाषा मे कहे तो ,यह वो technology है ,जिसके जरिये हम smartphone, computer, laptop में बिना तार यानी कि wireless तरीके से internet की सुविधा प्राप्त कर सकते है।

वैसे तो internet को दुनिया मे आये हुए कई साल हो गए , लेकिन क्या आपको पता है पहले internet connection लेना कितना मुश्किल होता था। Internet का जन्म तो network से हुआ था। पहले कोई भी information Digital तरीके से send करने के लिए cables ही एक मात्र रास्ता था। Cables से ही internet connection लिया जाता है। लेकिन फिर दिन प्रतिदिन बदलाव के कारण computer scientist ने एक ऐसी wireless technology बनाई, जिसका नाम wifi है । आज कल हर कोई जानता है wifi के बारे में , नए पीढ़ी के युवा इसी wireless technology के जरिये internet से जुड़े रहते है। तो आइए अब हम आपको विस्तार में बताते है कि wifi क्या होता है।

  • What Is Wi-Fi?
  • Wi-Fi definition and meaning?
  • WIFI Full Form?
    Who invented Wifi?
    History of wifi (What is wifi history
    ?
  • wifi technology How does it work? ?

wifi stands for and Wifi Standard (wifi मानक)?


WiFi stands for Wireless Fidelity and is the same thing as saying WLAN which stands for “Wireless Local Area Network wifi एक मानक है। जिस standard को हम follow करके computer को wireless network से जोड़ते है। अभी के समय मे जितने भी smartphone , laptop , printer और computer है , इस सब मे एक wifi chip रहती है। जिसके जरिये हम और आप wireless router से connect करते है और internet इस्तेमाल करते है। wifi enable होने के बाद जब एक बार wireless router से connect हो जाता है, तब आप internet access कर सकते है। लेकिन router को भी internet से जुड़े रहने के लिए DSL और Cable Modem का इस्तेमाल करना जरूरी होता है , वरना internet access नही होता।


wifi वैसे तो hifi से मिलता जुलता है जिसका पूरा नाम high fidelity है। wifi का पूरा नाम wireless fidelity नही है। यह बस एक नाम है। wifi alliance के द्वारा चुना गया है। इसको WLAN नाम से भी जाना जाता है।

WiFi stands for Wireless Fidelity

what is the Full Form Of Wifi (wifi का फुल फॉर्म क्या है?)


Wifi का फुल फॉर्म होता है :- Wireless Fiidelity

Who invented Wifi? Wifi का अविष्कार किसने किया था?

wifi का अविष्कार John O’Sullivan और John Deane ने 1991 में किया था।

History of wifi (What is wifi history? History of wifi (wifi का इतिहास क्या है?)

wifi का जन्म 1985 में हुआ था। United State FCC ने जब ये एलान किया कि wireless frequency 900MHZ,2.4 Ghz और। 5.8Ghz को कोई भी बिना Licence के इस्तेमाल कर सकता है, तब इसके इतिहास की शुरुवात हुई ।

microwave जैसे उपकरणों का इस्तेमाल घरेलू उपकरणों में किया जाता था ,इसलिए ये मन जाता था कि इनका कोई use नही है। खासकर Communication में । इसलिए इस band को उपयोग लायक बनाने के लिए FCC ने इसका उपयोग अनिवार्य कर दिया , जिसका नाम wifi Spread Spectrum Technology रखा गया।

Spread spectrum technology का licence 1941 में लिया गया था। licence को George Antheil और Actor Hedy Lammar ने लिया था। यह वो technique थी, जिसके द्वारा signals को multiple frequencies के साथ भेजा जाता था। इस technology के बाद wireless signals में काफी improvement नज़र आया। यह technology Interference problems को solve करने में fail रही। क्योंकि उस समय के mobiles में पहले से ही Radio install रहता था। जिसकी वजह से wifi standards range signals की quality पे काफी असर पड़ता था।

उसी समय एक technology आ रही थी। जिसका नाम WLAN (wireless local area network) था। जिसमे बहुत सारी खराबी थी । जैसे WLAN का कोई standard नही था। अलग -अलग company की devices को जोड़ने में काफी परेशानियो का सामना करना पड़ता था।

History of wifi

1988 में NCR Corporation को तत्काल एक wireless cash register की जरूरत थी। इसलिए उन्होंने Victor Hayes और Bruce Tuch की मदद से Institude of Electrical and Electronic Engineers (IEEE) को एक standard बनाने की request की । 1997 में standard तयार हो चुका था और जिसका नाम “802.11”. था। इसको 1997 में ही publish किया गया था।

उस समय wifi speed test 802.11 standard में data transfer की wifi speed करीब 2 megabits per/second थी। 1999 में 802.11a को प्रकाशित किया गया था। इसकी रफ्तार करीब 54 megabits per/second तहज। यह बहुत महँगा था इसलिए इसका अगला version प्रकाशित हुआ था , जिसका नाम 802.11b था। इससे wifi technology की शुरुवात हो गयी थी । यह version सस्ता था और इस network की range बहुत ज्यादा थी। इसलिए इसने काफी तेजी से hardware market में अपना रुतबा कायम कर लिया था। range और compatibility के कारण काफी मशहूर था। इसी वजह से wifi 6 company आपस मे मिलकर एक wireless ethernet compatibility alliance , or WECA का गठन किया। जिसके द्वारा ये check किया जाता था कि wifi compatibility है या नही 2002 में, उन्होंने wifi शब्द ,wireless और एक शब्द Hifi से लिया था। जिसका नाम कुछ साल बाद wifi alliance से जाना जाने लगा। तो ये था wifi का इतिहास ।

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wifi technology How does it work? ?wifi technology काम कैसे करती है?

आज कल हर जगह wifi5 का इस्तेमाल किया जाता है। चाहे वो घर में हो , आफिस में हो या होस्टल में , लेकिन किसी को यह नही पता कि technology काम कैसे करती है। सबसे पहले तो इस technology का इस्तेमाल करने के लिए एक electronic device की जरूरत होती हैं। जिसको wireless transmitter/router/hub कहते है। यह wifi network को create करता है। ये wireless device broadband connection के माध्यम से information receive करता है। इसके अंदर कुछ components होते है, जो इस information को radio waves में convert कर देता है। ये device इन converted waves को बाहर Emit करता है। इस प्रक्रिया के जरिये एक छोटा सा wireless signals का area बनता है, जिसे हम wifi zone कहते है। और यह area एक WLAN का रूप ले लेता है और इसी area में जितने भी smartphones, laptop, printer, अगर इन सभी devices में in built wireless adapter होते है तो उनकी मदद से आसानी से wifi signals को प्राप्त कर सकते है।

wifi technology How does it work?

यह बात याद रहे कि अगर कोई mobile wifi से connected है तो यह समझ जाना उस device में wirelesa adapter है। Radio signals strong न होने के कारण उस network की दूरी सीमित रहेगी। इसकी wifi range 10 से 20 meter तक रहती है

wifi Radio waves आसानी से दीवार के आर पास हो सकता है। इसलिए आप आस पास वाले कमरों में भी internet की सुविधा प्राप्त कर सकते है।एक घर के लिए एकwifi wireless router काफी होता है।आप जितना router के पास जाएंगे उतनी ही internet की speed तेज़ होगी और network भी strong होगा।
जब आप वापस कुछ information(text, vedio, audio, pics) wireless router/transmitter के पास भेजेंगे , तो प्रकिया विपरीत रूप से चलेगी।।जैसे कि आप wifi से जुड़े हुए है जैसे आपने अपने दोस्त को text message send किया है । तो यह message mobile से बहार निकलने से पहले Radio waves में convert होता है और router/transmitter तक signals पहुचने के बाद router text को signal में convert करके broad band में transmit कर देता है। उसी में receiver का address भी रहता है। तो इस तरह काम करता है wifi ।

जरूरी सूचना :- कुछ devices होती है जैसे Laptop, mobile, tablet , इनमे wireless adapter पहले से ही अंदर मौजूद होता है। इसी कारण सब mobile phones wifi से internet की सुविधा प्राप्त करते है। कुछ ऐसे भी है जिनमे wireless adapter नही होता जैसे desktop. इसलिए इनके लिए adapter या wireless card को खरीदना पड़ता है। Adapter को फर हमे desktop के USB port में लगाया जाता है , जिससे हम desktop में भी internet access कर सकते है।

Features of Wifi (wifi के features)?

तो आइए अब हम जानते है कि wifi की क्या खासियत है।

(1) Efficiency:- जब कोई technology किसी चीज में पूरी तरह सही या निपुण ना हो , तब तक हम उसे efficient नही कह सकते। हर कोई आज कल internet के लिए cellular network का इस्तेमाल करते है। लेकिन आपको यह नही पता कि cellular network का area क्षेत्र ज्यादा होता है।
लेकिन जब आप चलती गाड़ी में हो , तब आप internet को use तो करते है, लेकिन आप बार बार अलग network से जुड़ जाते है। और इसी वजह से आपकी mobile की battery ज्यादा खत्म होती है और उसे बार बार charge करना पड़ता है।

हम अगर wifi की बात करे तो वह radio waves का इस्तेमाल करता है। इसके लिए आपको जो electronic device की जरूरत होती है वह device होता है router । Router को आप कम दूरी के लिए इस्तेमाल कर सकते है और यह काफी high speed internet की सेवा देता है। इसमे आपके smartphone की battery भी जल्दी खत्म नही होता ।

(2) जितनी भी network provider companies है , उनसे compare कर ले , wifi जितना सस्ता plan कोई और नही दे सकता। mobile plans में जो भी data होता है वो कुछ GBतक ही होता है । और wifi में आपको 50GB का plan भी मिल सकता है या उससे भी ज्यादा का मिल सकता है। wifi में आप जितना भी data खर्च कर लो ।इसमे कोई limit नही होती। बाकी जो भी companies है जैसे airtel, reliance jio, vodafone आदि सब मे limit रहती है।

(3) wifi network में internet की जो speed होती है उसका comparison अगर हम mobile network speed से करे तो wifi की speed काफी ज्यादा होगी। mobile network से अगर आप कुछ mail पढ़ रहे है या online book पढ़ रहे है तो तब तक mobile network की speed काफी अच्छी रहेगी । लेकिन जब आप vedio या audio download करते है तो आपके mobile network की speed बहुत कम हो जाती है और wifii से downloading बहुत ही आसानी से हो जाती है उसकी speed बहुत ही अच्छी होती है।

(4)Cost:- आज कल लोग unlimited plans करा लेते है। उनको खबर ही नही होती कि उनका बिल कितना हो जाता है। लेकिन 1 साल पेजले जो mobile data का price था , recharge करने से पहले कई बार सोचना पड़ता था। अब तक आप जितना भी free data इस्तेमाल कर चुके है। उसको अगर calculate किया जाए तो बहुत बड़ा बिल आएगा और ये आम बात है। अगर आपके घर मे कोई wifi connection लेते है तो आपका खर्चा बहुत कम हो जाएगा बहुत सस्ता plan मिल जाएगा। जिसको आप ओर आपकी पूरी family इस्तेमाल कर सकती है। wifi सस्ता होता है इसी कारण ही इसको hostel, colleges ,school ,office आदि जगह इस्तेमाल किया जाता है।इसे आप online vedio call और voice calling के जरिये अपने mobile के bill को भी। कम कर सकते है।
इसलिए यह cost effective और money saving है।

उम्मीद है आपको हमारा ये article अच्छे से समझ आया होगा।